यूपी में आर्म्स लाइसेंस रिपोर्ट पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- अदृश्य शस्त्र’ ज्यादा खतरनाक

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा यूपी में बाहुबली और आपराधिक छवि वाले लोगों के शस्त्र लाइसेंस की रिपोर्ट मांगे जाने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने “अदृश्य शस्त्र” को समाज के लिए ज्यादा खतरनाक बताते हुए अवैध निर्माण, फंड और संपत्तियों की जांच की मांग उठाई।

यूपी में आर्म्स लाइसेंस रिपोर्ट पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- अदृश्य शस्त्र’ ज्यादा खतरनाक

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 23 मई 2026

उत्तर प्रदेश में बाहुबली नेताओं और आपराधिक छवि वाले लोगों के शस्त्र लाइसेंस की जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सिर्फ लाइसेंसी हथियार ही खतरा नहीं हैं, बल्कि कुछ “अदृश्य शस्त्र” भी देश और समाज को अंदर से नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।अखिलेश यादव ने अपने सामाजिक माध्यम मंच ‘एक्स’ पर लंबा संदेश साझा करते हुए बीजेपी और उसके सहयोगियों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कई जगहों पर अवैध निर्माण, बिना अनुमति के कार्यालय और संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार केवल चुनिंदा मामलों में कार्रवाई कर रही है जबकि बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी हो रही है।

अदृश्य शस्त्र वाले बयान से बढ़ी राजनीतिक बहस

सपा प्रमुख ने कहा कि असली हथियारों के लिए तो लाइसेंस जारी किए जाते हैं, लेकिन समाज में ऐसे अदृश्य हथियार भी सक्रिय हैं जो नफरत फैलाने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और लोगों के बीच तनाव पैदा करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े कुछ लोग इन ताकतों को संरक्षण दे रहे हैं और यही कारण है कि प्रदेश का माहौल लगातार तनावपूर्ण बनता जा रहा है।उन्होंने अपने बयान में कहा कि जनता अब सिर्फ हथियारों की जांच नहीं बल्कि उन ताकतों की भी पड़ताल चाहती है जो पर्दे के पीछे रहकर समाज को बांटने का काम कर रही हैं। अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी और उसके वैचारिक सहयोगियों पर हमला माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए सपा अब वैचारिक मुद्दों पर भी आक्रामक रणनीति अपना रही है।

वकीलों के चेंबर तोड़े जाने का भी उठाया मुद्दा

अखिलेश यादव ने हाल ही में लखनऊ में वकीलों के चेंबर तोड़े जाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन आम लोगों और वकीलों के निर्माणों पर कार्रवाई कर सकता है तो फिर बीजेपी नेताओं और उनके करीबियों की दुकानों, कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की वैधता की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता से जुड़े लोगों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं।सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई निर्माण बिना वैध नक्शे और अनुमति के खड़े किए गए हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए और यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है तो उसे सत्ता से जुड़े लोगों की संपत्तियों की भी जांच करानी चाहिए।

चंदा और फंड के हिसाब की उठाई मांग

अपने संदेश में अखिलेश यादव ने बीजेपी और उसके सहयोगियों पर विभिन्न आयोजनों, आपदाओं और निर्माण कार्यों के नाम पर चंदा जुटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर इन फंडों का इस्तेमाल कहां हुआ और उनका पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी फंड और चंदों का स्वतंत्र लेखा परीक्षण कराया जाए।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कई कथित संगठन और लोग बिना पंजीकरण के जमीनें खरीदकर निर्माण कैसे कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि ऐसी संपत्तियों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यह भी बताया जाना चाहिए कि क्या ये बेनामी संपत्तियों की श्रेणी में आती हैं या नहीं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।

बीजेपी नेताओं और सहयोगियों पर लगाए गंभीर आरोप

अखिलेश यादव ने बीजेपी से जुड़े लोगों पर गुप्त गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि ऐसे लोगों के खर्च और गतिविधियों का संचालन कौन करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन कार्यालयों और ठिकानों से गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उन्हें कार्यालय कहा जाए या किसी और प्रकार का अड्डा।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संगठन सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं और प्रदेश में तनावपूर्ण माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि जनता अब इन सभी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच चाहती है ताकि सच सामने आ सके।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सियासी हलचल

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों से बाहुबली नेताओं और आपराधिक छवि वाले लोगों के शस्त्र लाइसेंस की रिपोर्ट तलब की है। अदालत यह जानना चाहती है कि किन लोगों को लाइसेंस जारी किए गए हैं और उनके खिलाफ क्या आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है। समाजवादी पार्टी इसे कानून व्यवस्था और सत्ता संरक्षण से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी इसे कानून के दायरे में होने वाली सामान्य प्रक्रिया बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा गरमा सकता है।