बारिश बनी काल! छत गिरी, पिता की मौत

हापुड़ के पिलखुवा में लगातार बारिश के बीच जर्जर मकान की छत गिरने से 52 वर्षीय अशफाक की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

बारिश बनी काल! छत गिरी, पिता की मौत

दि राइजिंग न्यूज़ | हापुड़ | 8 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा स्थित सद्दीकपुरा मोहल्ले में लगातार हो रही वर्षा के बीच एक जर्जर मकान की छत अचानक गिर गई। हादसे में ५२ वर्षीय अशफाक की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने राहत कार्य चलाकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना बरसात के मौसम में जर्जर भवनों की अनदेखी से पैदा होने वाले खतरे की गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

लगातार बारिश ने एक परिवार की खुशियां छीनी

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने एक परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। पिलखुवा क्षेत्र के सद्दीकपुरा मोहल्ले में गुरुवार सुबह एक जर्जर मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में ५२ वर्षीय अशफाक की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग तुरंत सहायता के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए।बताया जा रहा है कि लगातार हो रही वर्षा के कारण मकान की दीवारें और छत काफी कमजोर हो चुकी थीं। परिवार को इस बात का अंदेशा नहीं था कि सुबह के समय इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। अशफाक अपने परिवार का पालन-पोषण मेहनत-मजदूरी और फेरी लगाकर करते थे। उनकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।


सोते समय भरभराकर गिरी मकान की छत

हादसे के समय अशफाक अपने दोनों बेटों, १८ वर्षीय नाजिम और १७ वर्षीय कासिम के साथ कमरे में सो रहे थे। सुबह अचानक तेज आवाज के साथ मकान की पूरी छत उनके ऊपर आ गिरी। किसी को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया और तीनों उसके नीचे दब गए।

चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत घर की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों ने बिना किसी देरी के ईंटें और मलबा हटाने का काम शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल भी मौके पर पहुंच गए। करीब आधे घंटे तक लगातार चले राहत कार्य के बाद तीनों को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल भेजा गया।


अस्पताल में पिता को मृत घोषित किया गया

अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने अशफाक की जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं उनके घायल बेटे का उपचार जारी है और चिकित्सकों की निगरानी में उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल पहुंचते ही बदहवास हो गए और रो-रोकर उनका बुरा हाल हो गया।

मृतक के भाई ने बताया कि पिछले कई दिनों से लगातार वर्षा हो रही थी, जिससे मकान की छत और दीवारें पूरी तरह कमजोर हो गई थीं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार समय रहते मकान की मरम्मत नहीं करा सका। इसी लापरवाही और मजबूरी ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।


मोहल्ले के लोगों ने दिखाई इंसानियत

हादसे के तुरंत बाद पड़ोसियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने फावड़े और अन्य साधनों की मदद से मलबा हटाया और दबे हुए लोगों को बाहर निकालने का हर संभव प्रयास किया। स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सका।

पड़ोसियों का कहना है कि यदि कुछ और देर हो जाती तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। घटना के बाद पूरे मोहल्ले के लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए। सभी ने प्रशासन से जर्जर मकानों की तत्काल जांच कराने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।


पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने पूरे इलाके का निरीक्षण किया और हादसे के कारणों की जानकारी जुटानी शुरू की। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद परीक्षण के लिए भेज दिया।

प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आसपास के अन्य जर्जर मकानों का भी निरीक्षण कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


बरसात में जर्जर मकान बन रहे मौत का कारण

यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि बरसात के मौसम में जर्जर मकान लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में आज भी ऐसे अनेक पुराने मकान मौजूद हैं, जिनकी हालत बेहद खराब है। लगातार वर्षा होने पर इन भवनों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा शुरू होने से पहले पुराने भवनों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित घोषित किया जाना चाहिए। जिन मकानों की स्थिति अत्यधिक खराब हो, उन्हें तुरंत खाली कराया जाए या उनकी मरम्मत कराई जाए। समय रहते ऐसे कदम उठाने से कई परिवारों को इस तरह के दर्दनाक हादसों से बचाया जा सकता है।