AMU चुनाव: पोस्टर से प्रचार तक पाबंदी, प्रत्याशियों पर नजर:60 सदस्यीय कमेटी संभालेगी निगरानी; नियम तोड़े तो रद्द हो सकती है उम्मीदवारी,बिहार लॉबी ने भी उतारा अध्यक्ष पद का प्रत्याशी
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) छात्रसंघ चुनाव में इस बार प्रचार करना ही नहीं, नियमों के दायरे में रहकर चुनाव लड़ना भी प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव को निष्पक्ष और अनुशासित बनाने के लिए निगरानी की व्यापक तैयारी की है। 60 सदस्यीय कमेटी प्रत्याशियों के प्रचार, भाषण, चुनावी गतिविधियों और नियमों के पालन पर नजर रखेगी। उल्लंघन पर उम्मीदवारी ही नहीं, जीतने के बाद पद भी रद्द हो सकता है।
इधर, चुनावी तैयारियों के बीच बिहार से जुड़े छात्रों की लॉबी ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस में एमए तृतीय सेमेस्टर के छात्र और बिहार के सहरसा जिले के असमर फरीदी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं। अलग-अलग छात्र समूहों के सक्रिय होने के साथ चुनावी मुकाबले की सरगर्मी बढ़ने लगी है। पांच नवंबर को सुबह नौ बजे मतदान और शाम सात बजे से मतगणना प्रस्तावित है।
प्रचार के हर तरीके पर पाबंदी, कैंपस में तय होंगे नियम
चुनाव अधिकारी प्रो.जावेद तालिब की ओर से जारी गाइडलाइन में प्रचार के तरीकों से लेकर मतदान और मतगणना तक के लिए नियम तय किए गए हैं। प्रत्याशी प्रिंटेड पोस्टर, पंपलेट और बैनर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। हाथ से बने पोस्टर भी कैंपस में निर्धारित स्थानों पर ही लगाए जा सकेंगे। विश्वविद्यालय परिसर के बाहर जुलूस, जनसभा और प्रचार पर रोक रहेगी। लाउडस्पीकर, वाहनों और जानवरों के जरिए प्रचार करना भी प्रतिबंधित है।
प्रत्याशियों के भाषण का समय निर्धारित रहेगा। देर रात तक प्रचार करने और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यवधान डालने की अनुमति नहीं होगी। जुलूस या सभा निकालने के लिए प्रॉक्टर की लिखित अनुमति लेनी होगी। जाति, धर्म, क्षेत्र या भाषा के नाम पर वोट मांगने और समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर भी रहेगी निगरानी
पारंपरिक प्रचार माध्यमों पर पाबंदियों के बीच सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का अहम माध्यम बन सकता है। प्रत्याशियों की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी निगरानी की तैयारी है। चुनावी खर्च की निर्धारित सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा। कैबिनेट पदों के लिए खर्च की सीमा 10 हजार रुपये और अध्यक्ष पद के लिए 20 हजार रुपये बताई गई है। राजनीतिक दलों से आर्थिक मदद लेने पर रोक है। प्रत्याशियों को परिणाम घोषित होने के दो सप्ताह के भीतर चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा देना होगा।
75 प्रतिशत उपस्थिति और रिकॉर्ड की होगी जांच
चुनाव लड़ने के लिए नियमित छात्र होना, कम से कम एक साल के कोर्स में नामांकित होना और 75 प्रतिशत या विश्वविद्यालय की ओर से तय न्यूनतम उपस्थिति—इनमें जो भी अधिक हो, उसे पूरा करना जरूरी है। उम्मीदवार के लिए चुनाव लड़ने वाले वर्ष में बैक नहीं होना और आपराधिक रिकॉर्ड से मुक्त होना भी अनिवार्य है। बाहरी व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगा।
60 सदस्यीय कमेटी चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के पालन पर नजर रखेगी। मतदान के दिन प्रत्याशियों को चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों का सहयोग करना होगा। वैध पहचान पत्र के बिना मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। पानी के अलावा खाद्य सामग्री और प्रचार सामग्री बांटने की अनुमति नहीं होगी।
कुलपति की ओर से पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। मतदान समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर प्रत्याशियों को मिलकर कैंपस, विशेषकर मतदान क्षेत्र की सफाई भी करानी होगी। नियमों के उल्लंघन पर उम्मीदवारी या निर्वाचित पद रद्द करने के साथ चुनाव संबंधी अपराधों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
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