भाषा विश्वविद्यालय में विधिक कार्यशाला:असमानता, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव के मुद्दों पर चर्चा
लखनऊ में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के निशुल्क विधिक सहायता केंद्र और एनजीओ AALI के संयुक्त तत्वावधान में 22 अक्टूबर को ‘जेंडर और पितृसत्ता को समझना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण में हुआ। कार्यशाला में विशेषज्ञ नेहा तिवारी और मंतशा ने लैंगिक असमानता, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे। उन्होंने समानता, गरिमा और न्याय को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत विधि अध्ययन संकाय के डीन डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी के स्वागत संबोधन से हुई। समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इस दौरान अंशुल पांडेय, डॉ. प्रशांत वरुण, निधि सिंह राठौर, डॉ. राजकुमार परिचेता, डॉ. आराधना अस्थाना, डॉ. श्वेता त्रिवेदी और डॉ. मोहित मिश्रा उपस्थित रहे। अंत में डॉ. दीक्षा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में भेदभावपूर्ण प्रथाओं को चुनौती देकर समावेशी और समानतापूर्ण समाज बनाने का संदेश दिया गया।
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