बेल्जियम से आया 110 फीट लंबा रिएक्टर:240 पहियों वाले ट्रेलर से कुंभी पहुंचा, बलरामपुर चीनी मिल के बायो-पॉलिमर प्लांट में होगा इस्तेमाल

Oct 23, 2026 - 08:44
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बेल्जियम से आया 110 फीट लंबा रिएक्टर:240 पहियों वाले ट्रेलर से कुंभी पहुंचा, बलरामपुर चीनी मिल के बायो-पॉलिमर प्लांट में होगा इस्तेमाल
लखीमपुर खीरी में कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के निर्माणाधीन बायो-पॉलिमर प्लांट के लिए बेल्जियम से मंगाया गया विशालकाय रिएक्टर गुरुवार शाम करीब 4 बजे सुरक्षित पहुंच गया। 110 फीट लंबे और 26 फीट चौड़े इस रिएक्टर को 240 पहियों वाले विशेष ट्रेलर से लाया गया। इसके प्लांट परिसर पहुंचने पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। करीब 3080 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस प्लांट में रिएक्टर का इस्तेमाल पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) के उत्पादन में किया जाएगा। इससे बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक और अन्य जैव-आधारित उत्पाद बनाने में मदद मिलेगी। 15 मई को पारादीप बंदरगाह से शुरू हुआ था सफर विशालकाय रिएक्टर की यात्रा 15 मई को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से शुरू हुई थी। वहां से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्ते इसे कुंभी लाया गया। बुधवार को ट्रेलर बहराइच के रास्ते लखीमपुर शहर के छाउछ पहुंचा था, जहां रात में इसे रोका गया। गुरुवार सुबह ट्रेलर को निर्माणाधीन बायो-पॉलिमर प्लांट के लिए रवाना किया गया और शाम करीब 4 बजे यह सुरक्षित गंतव्य तक पहुंच गया। 240 पहियों वाले ट्रेलर से पहुंचाया गया रिएक्टर 110 फीट लंबे और 26 फीट चौड़े इस भारी उपकरण को कई राज्यों से होते हुए सुरक्षित पहुंचाना परिवहन टीम के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके लिए 240 पहियों वाले विशेष ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया। अभियान में तीन चालक, तकनीकी विशेषज्ञ और करीब 40 कर्मचारी शामिल रहे। रिएक्टर के सुरक्षित पहुंचने के बाद टीम ने राहत महसूस की। यूनिट हेड ने प्रशासनिक अधिकारियों का जताया आभार रिएक्टर के प्लांट परिसर पहुंचने पर बलरामपुर चीनी मिल के यूनिट हेड डॉ. सुनील कुमार यादव ने परिवहन टीम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े उपकरण को सुरक्षित पहुंचाने में प्रशासन और विभिन्न विभागों के सहयोग की अहम भूमिका रही। डॉ. यादव ने जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह के साथ लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, बिजली विभाग, पुलिस और यातायात पुलिस के अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के बीच समन्वय के कारण परिवहन अभियान सुगम रहा। रिएक्टर से बनेगा बायो-आधारित पॉलिमर बेल्जियम से मंगाया गया साइक्लाइजेशन रिएक्टर प्लांट में पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) के उत्पादन की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा। पीएलए एक जैव-आधारित पॉलिमर है, जिसका इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक और कई अन्य उत्पाद बनाने में किया जाता है। उत्पादन के बाद इसे ग्रेन्यूल्स और पेलेट्स के रूप में तैयार कर विभिन्न उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस तकनीक से तैयार होने वाली सामग्री पारंपरिक प्लास्टिक के कुछ विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के अपघटन की क्षमता उनकी संरचना और औद्योगिक कंपोस्टिंग जैसी उपयुक्त परिस्थितियों पर निर्भर करती है। 3080 करोड़ की परियोजना से बढ़ेंगी रोजगार की संभावनाएं कुंभी में स्थापित किया जा रहा बायो-पॉलिमर प्लांट करीब 3080 करोड़ रुपए की लागत वाली औद्योगिक परियोजना है। इसकी आधारशिला 22 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रखी थी। परियोजना से खीरी जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। विशालकाय रिएक्टर के सुरक्षित पहुंचने को प्लांट निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब इसके इंस्टॉलेशन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे होने के बाद परियोजना को उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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