भाजपा में गजब! निष्कासित नेता को प्रदेश कार्यकारिणी में:अलीगढ़ में 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में जिलाध्यक्ष ने किया था निष्कासित
भाजपा में अंदरूनी खेमेबंदी और संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किए गए तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी को अब प्रदेश कार्यकारिणी में जगह मिल गई है। सोमवार देर शाम जारी प्रदेश कार्यकारिणी की सूची में उनका नाम शामिल होने के बाद पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिस निष्कासन पत्र के आधार पर उन्हें पार्टी से बाहर किया गया था, वह अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिला स्तर से निष्कासन की कार्रवाई हुई थी, तो प्रदेश संगठन को इसकी जानकारी थी या नहीं? अगर जानकारी थी, तो फिर धर्मेंद्र चौधरी को प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य कैसे बना दिया गया?
जिला स्तर पर निष्कासन, प्रदेश स्तर पर नई जिम्मेदारी
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा के तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी समेत चार लोगों पर पार्टी प्रत्याशी के विरोध में काम करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने इन सभी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष समेत प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों को लिखित रूप में भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद धर्मेंद्र चौधरी अब प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बना दिए गए हैं।
निष्कासन के बाद उनकी पार्टी में वापसी को लेकर प्रदेश स्तर से किसी औपचारिक घोषणा या पत्र की जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि, धर्मेंद्र चौधरी लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देते रहे। अब प्रदेश कार्यकारिणी में उनकी नियुक्ति के बाद पुराने निष्कासन और संगठन के मौजूदा फैसले के बीच का अंतर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
पुराना पत्र वायरल, खेमेबंदी की चर्चा तेज
धर्मेंद्र चौधरी की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पुराने निष्कासन पत्र को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर सवाल उठ रहे हैं। अलीगढ़ भाजपा में लंबे समय से चली आ रही खेमेबंदी के बीच इस घटनाक्रम को संगठन के भीतर अलग-अलग गुटों की खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा यह भी है कि क्या प्रदेश संगठन तक निष्कासन की पूरी जानकारी नहीं पहुंची थी या फिर जानकारी होने के बावजूद नियुक्ति का फैसला लिया गया।
हालांकि, नियुक्ति के पीछे की वजह या निष्कासन को लेकर प्रदेश संगठन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
धर्मेंद्र बोले- मोनोपॉली के चलते किया गया था निष्कासन
धर्मेंद्र चौधरी का कहना है कि उस समय उन्हें मोनोपॉली के तहत पार्टी से निष्कासित किया गया था। वह जिलाध्यक्ष पद के दावेदार थे और इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उनका दावा है कि उन्हें निष्कासन संबंधी कोई पत्र नहीं मिला और न ही संगठन की ओर से उन्हें कोई आदेश प्राप्त हुआ। इसके बावजूद वह पार्टी में लगातार काम करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
प्रदेश कार्यकारिणी में जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने प्रदेश संगठन का आभार जताते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे वह बखूबी निभाएंगे।
जिलाध्यक्ष बोले- प्रदेश संगठन को भेज रहे पूरी जानकारी
भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला ने कहा कि वर्ष 2024 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते चार लोगों को निष्कासित किया गया था। इनमें धर्मेंद्र चौधरी के अलावा दीपक शर्मा अनु आजाद और जट्टारी के पूर्व चेयरमैन मनवीर चौधरी तथा युवा नेता अमित चौधरी के नाम भी शामिल थे।
धर्मेंद्र चौधरी को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किए जाने के सवाल पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि उस समय की कार्रवाई और संबंधित जानकारियों से प्रदेश संगठन को अवगत कराया जा रहा है। संगठन को जरूरी सूचनाएं भेजी जा रही हैं। प्रदेश स्तर से जो निर्णय लिया जाएगा, उसके अनुसार आगे कदम उठाया जाएगा।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने अलीगढ़ भाजपा में संगठनात्मक फैसलों, निष्कासन की प्रक्रिया और गुटीय राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें प्रदेश संगठन के रुख पर हैं कि वह पुराने निष्कासन और नई नियुक्ति के बीच उठे सवालों पर क्या कदम उठाता है।
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