अमेरिका से ट्रेड डील पर भारत की दो टूक, पहले मानी जाएगी ये शर्त!
भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। पीयूष गोयल ने कहा कि प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और रियायती शुल्क मिलने के बाद ही समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 03 सितंबर 2026
अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत किसी भी व्यापार समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप नहीं देगा। भारत की प्राथमिकता यह है कि उसके निर्यातकों को अमेरिका में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक सुविधा मिले।पीयूष गोयल के मुताबिक, यदि अमेरिका भारत को उसके प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर शुल्क दर उपलब्ध कराने में सक्षम होता है, तभी दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने कारोबारियों और निर्यातकों के हितों को ध्यान में रखकर ही अंतिम निर्णय लेगा।
प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर सुविधा की मांग
भारत की व्यापार वार्ता में अमेरिका से मिलने वाली शुल्क दर महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। भारत का मानना है कि यदि उसके प्रतिस्पर्धी देशों को अमेरिकी बाजार में कम शुल्क या अन्य व्यापारिक सुविधाएं मिलती हैं, तो भारतीय उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को समान या उससे बेहतर अवसर उपलब्ध हों।पीयूष गोयल ने कहा कि जैसे ही अमेरिका भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तरजीही शुल्क दर देने के लिए तैयार होगा, दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। इसके बाद समझौते के अंतिम प्रावधानों की घोषणा की जा सकती है।
व्यापार समझौतों से भारतीय कारोबारियों को मिलेगा अवसर
केंद्रीय मंत्री ने भारत द्वारा किए जा रहे अन्य व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जिन देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है, उनका उद्देश्य घरेलू कारोबारियों के लिए निर्यात के नए अवसर तैयार करना है। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।भारत आने वाले समय में कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ, खाड़ी सहयोग परिषद और इजरायल के साथ भी व्यापार समझौतों की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कारोबारियों के लिए अलग-अलग देशों के बाजारों में संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अमेरिका यात्रा के दौरान व्यापार वार्ता पर होगी चर्चा
पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके इसी महीने अमेरिका जाने की संभावना है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को बताया था कि पीयूष गोयल महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह जी-20 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के साथ दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर भी चर्चा कर सकते हैं।अमेरिकी राजदूत के अनुसार, भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच जारी वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ऐसे में पीयूष गोयल की आगामी अमेरिका यात्रा को व्यापार समझौते के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार के अलावा भी सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत और अमेरिका के बीच सहयोग केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश निवेश, नवाचार, प्रौद्योगिकी और नए कारोबार के अवसरों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे व्यापारिक संबंध विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो दोनों देशों के लिए निष्पक्ष और लाभकारी हों।उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में हुई पैक्ट सिलिका घोषणा का भी उल्लेख किया। इस पहल का उद्देश्य ऐसा नियामकीय ढांचा तैयार करना है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिल सके और भारतीय तथा अमेरिकी कंपनियों के बीच सीमा पार निवेश के अवसर बढ़ सकें। इससे दोनों देशों के उद्यमियों और नए कारोबार शुरू करने वाली अगली पीढ़ी को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
भारत ने स्पष्ट कर दी अपनी प्राथमिकता
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर भारत का रुख फिलहाल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। भारत चाहता है कि समझौते के तहत उसके निर्यातकों को ऐसा लाभ मिले, जिससे वे अमेरिकी बाजार में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के उत्पादों के सामने मजबूती से टिक सकें।इसलिए शुल्क दरों को लेकर भारत किसी भी ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है, जिससे उसके घरेलू कारोबारियों और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हो। अब दोनों देशों के बीच आगे होने वाली वार्ताओं में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका भारत की इस प्रमुख मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
मुख्य बिंदु
- अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
- बेहतर और रियायती शुल्क मिलने पर ही समझौते को अंतिम रूप देने की बात।
- भारत प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अपने निर्यातकों को बेहतर अवसर चाहता है।
- पीयूष गोयल के अमेरिका दौरे के दौरान व्यापार वार्ता आगे बढ़ सकती है।
- भारत कई अन्य देशों और क्षेत्रों के साथ भी व्यापार समझौतों पर काम कर रहा है।
- भारत-अमेरिका सहयोग व्यापार के अलावा निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।
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