'या तो जंतर-मंतर आओ, या...CJP की सरकार को दो टूक
जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के साथ बातचीत को लेकर नई शर्त रख दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी मंत्री के घर या कार्यालय नहीं जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार बातचीत चाहती है तो या तो प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या फिर किसी साझा सार्वजनिक स्थान, जैसे संविधान क्लब, में बैठक आयोजित की जाए। इस बयान के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
जंतर-मंतर पर पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत को लेकर नया मोड़ आ गया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि आंदोलनकारी बातचीत से पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन वे किसी मंत्री के आवास या सरकारी कार्यालय में बैठक नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या फिर संविधान क्लब जैसे किसी साझा सार्वजनिक स्थान पर बैठक आयोजित की जाए। पार्टी का कहना है कि सम्मानजनक और पारदर्शी माहौल में ही सार्थक वार्ता संभव है।
सरकार से बातचीत को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने रखी नई शर्त, जंतर-मंतर या साझा स्थान पर ही होगी बैठक
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत की संभावना एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि इस बार आंदोलनकारी संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सरकार के साथ बातचीत तो करेगा, लेकिन उसकी कुछ शर्तें होंगी। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आंदोलनकारी किसी भी मंत्री के आवास, निजी निवास या सरकारी कार्यालय में जाकर बैठक नहीं करेंगे।उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती है तो उसे आंदोलनकारियों के पास आना चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो दोनों पक्षों की सहमति से किसी सार्वजनिक और तटस्थ स्थान पर बैठक आयोजित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि वार्ता तभी सफल होगी जब दोनों पक्ष समान सम्मान और पारदर्शिता के साथ आमने-सामने बैठेंगे।
'सरकार बातचीत चाहती है तो जंतर-मंतर आए'
सौरव दास ने बताया कि बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से संपर्क कर यह संदेश दिया कि सरकार बातचीत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले भी संवाद का प्रस्ताव आया था और अब फिर से बातचीत की इच्छा जताई गई है।हालांकि उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आंदोलनकारी किसी भी नेता के घर या कार्यालय में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर पहुंचें। यदि यह संभव नहीं है तो संविधान क्लब जैसे किसी साझा सार्वजनिक स्थान पर बैठक रखी जाए, जहां दोनों पक्ष बराबरी के आधार पर अपनी बात रख सकें।
'पहले दिन ही बातचीत होती तो मामला इतना नहीं बढ़ता'
सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन की शुरुआत में संवाद स्थापित करने का प्रयास नहीं किया। उनके अनुसार यदि पहले ही दिन प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर ली जाती तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती और आंदोलन को लंबा नहीं खींचना पड़ता।उन्होंने कहा कि छात्र लगातार अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। यदि सरकार समय रहते उनकी बात सुन लेती तो टकराव की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने सरकार से अपील की कि अब भी देर नहीं हुई है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है।
'हम बातचीत से पीछे नहीं हट रहे'
सौरव दास ने स्पष्ट किया कि आंदोलनकारी किसी भी प्रकार से संवाद का विरोध नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से ही निकलता है और उनकी पार्टी भी इसी सिद्धांत पर विश्वास करती है।उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाना है। इसलिए सरकार को भी सकारात्मक सोच के साथ आगे आना चाहिए और आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए।
सोमवार को जेपी नड्डा से हुई थी पहली औपचारिक बैठक
इससे पहले सोमवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पार्टी के प्रतिनिधिमंडल से अपने आवास पर मुलाकात की थी। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली, जिसमें आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।पार्टी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच, छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की समीक्षा तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसी मांगें शामिल थीं।
सरकार ने बैठक के बाद क्या कहा
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों की सभी मांगों को गंभीरता से सुना है। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में विस्तृत चर्चा हुई और सभी मुद्दों को शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा।उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे धरना समाप्त करें और प्रशासन का सहयोग करें। सरकार का कहना है कि बातचीत का रास्ता खुला हुआ है और सभी मांगों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा। हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल कोई लिखित आश्वासन जारी नहीं किया गया है।
आंदोलनकारियों ने कहा- केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी
बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से केवल यह कहा गया है कि मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिला है। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका दावा है कि सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं और उनका उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार कराना है।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर क्या हैं प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि पेपर लीक की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।इसके अलावा प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आगे क्या हो सकता है
सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच संवाद की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन बैठक के स्थान को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद कायम हैं। यदि सरकार आंदोलनकारियों की शर्त स्वीकार कर लेती है तो आने वाले दिनों में नई बैठक हो सकती है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह वार्ता आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचते हैं तो लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के समाधान का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि बातचीत आगे नहीं बढ़ती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना भी बनी हुई है।