गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग तेज, मौलाना अरशद मदनी ने उठाए बड़े सवाल
मौलाना अरशद मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग दोहराते हुए मॉब लिंचिंग और गौकशी विवाद पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे देश में समान कानून लागू करने की मांग की।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 मई 2026
गाय के मुद्दे पर फिर गरमाई देश की राजनीति
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक बार फिर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाकर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देती है तो देश में गाय के नाम पर होने वाली हिंसा और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है। उनका कहना है कि मुसलमानों को इस फैसले से कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द मजबूत होगा।मौलाना मदनी ने सवाल उठाया कि जब देश की बड़ी आबादी गाय को माता के रूप में पूजती है तो फिर सरकार आखिर उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि इस मांग को केवल मुस्लिम संगठन ही नहीं, बल्कि कई साधु-संत और धार्मिक संगठन भी लंबे समय से उठाते आ रहे हैं।
गाय के नाम पर राजनीति और हिंसा का आरोप
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में गाय के मुद्दे को एक राजनीतिक हथियार बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार गौकशी या पशु तस्करी के नाम पर अफवाह फैलाकर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बनाया जाता है। उनके अनुसार इस तरह की घटनाओं ने समाज में डर और अविश्वास का माहौल पैदा किया है। लगातार फैलाए गए प्रचार की वजह से समाज के एक बड़े वर्ग में यह धारणा बना दी गई है कि मुसलमान गाय के विरोधी हैं, जबकि यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने दावा किया कि पहले बड़ी संख्या में मुसलमान गाय पालते थे और दूध के व्यवसाय से जुड़े रहते थे, लेकिन बीते कुछ वर्षों में बढ़ते तनाव के कारण लोगों ने गाय पालने से दूरी बनानी शुरू कर दी।
साधु-संतों के साथ मिलकर उठाई गई थी मांग
मौलाना मदनी ने बताया कि वर्ष 2014 में मुंबई में आयोजित एक बड़े सम्मेलन में कई साधु-संतों और विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ मिलकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई गई थी। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य देश में शांति, भाईचारा और धार्मिक सौहार्द को मजबूत करना था।उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद हमेशा से मुसलमानों को दूसरे धर्मों की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह देता रहा है। संगठन लगातार अपने मंचों और संदेशों के माध्यम से यह अपील करता है कि ऐसा कोई काम न किया जाए जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
ईद के दौरान भी दी जाती है विशेष सलाह
मौलाना मदनी ने कहा कि हर वर्ष ईद-उल-अजहा के अवसर पर संगठन की ओर से विशेष संदेश जारी किए जाते हैं। इनमें मुसलमानों से अपील की जाती है कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें और कानून का पालन करें। उन्होंने कहा कि इस्लाम आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की शिक्षा देता है।उनका कहना है कि बहुधार्मिक समाज में सभी समुदायों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए धार्मिक जिम्मेदारी निभाना बेहद जरूरी है।
अलग-अलग राज्यों के कानूनों पर उठाए सवाल
मौलाना मदनी ने देश में पशु वध से जुड़े अलग-अलग कानूनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब समान नागरिक संहिता की बात की जाती है तो यह तर्क दिया जाता है कि पूरे देश में एक समान कानून होना चाहिए, लेकिन गाय और पशु वध के मामले में अलग-अलग राज्यों में अलग कानून लागू हैं।उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में खुलेआम गोमांस की बिक्री और सेवन होता है, जबकि दूसरे राज्यों में इसी मुद्दे पर हिंसा और विवाद देखने को मिलते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून समान नहीं हैं तो फिर चयनात्मक तरीके से कार्रवाई क्यों की जाती है।
भाजपा पर दोहरे रवैये का आरोप
मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां भी कई जगह गोमांस पर खुली छूट है, लेकिन वहां किसी प्रकार का विरोध नहीं होता। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में मुसलमानों की आबादी ज्यादा है, वहां गाय के मुद्दे को राजनीतिक रूप से ज्यादा उछाला जाता है।उन्होंने दावा किया कि कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए गाय के मुद्दे का इस्तेमाल करते हैं और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं। उनके अनुसार चुनाव के समय ऐसे भावनात्मक मुद्दों को जानबूझकर हवा दी जाती है ताकि लोगों को बांटा जा सके।
देशभर में एक समान कानून लागू करने की मांग
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और पूरे देश में एक समान कानून लागू हो। उन्होंने कहा कि इससे विवाद समाप्त होगा और कानून का पालन भी निष्पक्ष तरीके से हो सकेगा।उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकार वास्तव में गाय की रक्षा चाहती है तो उसे राजनीति से ऊपर उठकर स्पष्ट और समान नीति बनानी चाहिए। उनका कहना है कि यही न्याय और निष्पक्षता का रास्ता है और इससे देश में सामाजिक तनाव भी कम होगा।