8.5 किलो वजन घटा, सोनम वांगचुक की जान पर संकट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सत्रह दिनों से अनशन पर बैठे शिक्षाविद सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि उनका वजन साढ़े आठ किलोग्राम घट चुका है और यदि अनशन जारी रहा तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।

8.5 किलो वजन घटा, सोनम वांगचुक की जान पर संकट

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अब मामला दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि लगातार सत्रह दिनों से भोजन न करने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है और यदि जल्द उचित चिकित्सा उपलब्ध नहीं कराई गई तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिका में न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने तथा सरकारों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

सत्रह दिनों से लगातार जारी है अनिश्चितकालीन अनशन

सोनम वांगचुक पिछले सत्रह दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे हैं। उनके आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और कई नागरिकों का समर्थन भी मिल रहा है। लगातार उपवास के कारण उनके शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ा है और उनकी शारीरिक क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि वह अत्यधिक कमजोरी महसूस कर रहे हैं और सामान्य गतिविधियां करने में भी कठिनाई हो रही है।

जनहित याचिका में दो दिन के भीतर जान जाने की आशंका जताई गई

कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि यदि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त नहीं किया तो अगले दो दिनों के भीतर उनकी जान जा सकती है। याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और जीवन की रक्षा के लिए तत्काल आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। याचिकाकर्ता ने इसे केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है।

साढ़े आठ किलोग्राम वजन घटने का दावा

याचिका और आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार अनशन शुरू होने के बाद से सोनम वांगचुक का लगभग साढ़े आठ किलोग्राम वजन कम हो चुका है। उनका शरीर लगातार कमजोर होता जा रहा है और चिकित्सकों की सलाह के बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है। समर्थकों का कहना है कि इतनी तेजी से वजन कम होना गंभीर चिकित्सकीय स्थिति का संकेत है और इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उनकी हालत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

रक्तचाप और रक्त में शर्करा का स्तर भी गिरा

आंदोलन से जुड़े लोगों ने बताया कि सोनम वांगचुक का रक्तचाप सामान्य स्तर से नीचे पहुंच चुका है। उनके रक्त में शर्करा का स्तर भी काफी कम दर्ज किया गया है, जिससे कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लंबे समय तक भोजन नहीं लिया गया तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

खड़े होने और चलने में भी हो रही परेशानी

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि सोनम वांगचुक अब बिना सहारे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं। जब भी वह उठने या बैठने का प्रयास करते हैं तो उन्हें चक्कर आने लगते हैं। यहां तक कि शौचालय जाने जैसे सामान्य कार्यों में भी उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लगातार कमजोरी और दर्द के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा हुआ है, जिससे समर्थकों की चिंता और बढ़ गई है।

सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग

जनहित याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार कराया जाना आवश्यक है ताकि उनकी जान बचाई जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकारों को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

समर्थकों ने भी जताई गहरी चिंता

आंदोलन से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि यह केवल एक आंदोलन का विषय नहीं बल्कि एक व्यक्ति के जीवन से जुड़ा मामला है। समर्थकों ने केंद्र सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है ताकि आंदोलन का शांतिपूर्ण अंत हो सके और किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

अठारहवें दिन भी जारी रहा अनशन

सोनम वांगचुक ने अठारहवें दिन भी अपना अनशन जारी रखा। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रही है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थक भी लगातार उनकी देखभाल में जुटे हुए हैं। हालांकि उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने चिंता व्यक्त की है और जल्द समाधान निकालने की आवश्यकता बताई है।

उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी सभी की नजर

अब पूरे मामले में सबसे अधिक निगाहें दिल्ली उच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। न्यायालय इस जनहित याचिका पर क्या निर्णय देता है, इससे आगे की स्थिति काफी हद तक तय होगी। दूसरी ओर आंदोलनकारियों ने बीस जुलाई को संसद तक पदयात्रा निकालने की घोषणा भी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।