पुरानी गाड़ियों के लिए बड़ी राहत
भारत में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के बढ़ते उपयोग के बीच पुराने वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। एक नई फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट पर काम चल रहा है, जिसकी मदद से BS4 और BS6 वाहनों को E20 से लेकर E100 तक के ईंधन के अनुकूल बनाया जा सकेगा। सफल परीक्षण के बाद इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 जून 2026
भारत में तेजी से बदल रहा है ईंधन का स्वरूप
देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण लगातार बढ़ रहा है और सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। भारत निर्धारित समय से पहले E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है और E100 ईंधन को भी कानूनी मंजूरी मिल चुकी है।हाल ही में दिल्ली में E85 ईंधन की शुरुआत की गई है, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसके साथ ही उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर नई संभावनाएं खुली हैं।
करोड़ों पुराने वाहन मालिकों के सामने था बड़ा सवाल
देश में बड़ी संख्या में BS4 और BS6 मानक वाले वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं। ऐसे में वाहन मालिकों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ था कि क्या उनकी पुरानी गाड़ियां भविष्य के इथेनॉल आधारित ईंधन पर चल सकेंगी या उन्हें नई गाड़ी खरीदनी पड़ेगी।अब इसी चिंता का समाधान फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट के रूप में सामने आता दिखाई दे रहा है।
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट
यह एक विशेष तकनीकी किट है जिसे वाहन में लगाकर उसे विभिन्न प्रकार के इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल बनाया जा सकता है।इसकी मदद से BS4 और BS6 मानक वाले पुराने चारपहिया वाहन E20, E85 और यहां तक कि E100 ईंधन का भी उपयोग कर सकेंगे।यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू हुई तो लाखों वाहन मालिकों को नई कार खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
विदेशों में पहले से हो रहा इस्तेमाल
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी के अनुसार अमेरिका, ब्राजील और फिनलैंड जैसे देशों में ऐसी कन्वर्जन किट का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है।इन्हीं देशों से दो किट भारत मंगाई गईं और परीक्षण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली को सौंपी गईं।
आईआईटी दिल्ली ने किया व्यापक परीक्षण
आईआईटी दिल्ली ने इस तकनीक का विभिन्न प्रकार के इथेनॉल मिश्रित ईंधनों के साथ परीक्षण किया।परीक्षण के लिए एक कार का उपयोग किया गया जिसे शहर और हाईवे दोनों परिस्थितियों में लगभग 5,000 किलोमीटर तक चलाया गया।इस दौरान E20, E85 और E100 ईंधन का उपयोग कर किट की कार्यक्षमता को परखा गया।
परीक्षण में मिले सकारात्मक परिणाम
परीक्षण के दौरान किसी प्रकार की गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई।वाहन का उत्सर्जन स्तर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया और इंजन के प्रमुख पुर्जों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। यह सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही क्योंकि उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर अक्सर इंजन सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
माइलेज में कमी लेकिन खर्च में राहत
परीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि इथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होने के कारण माइलेज में लगभग 4 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल आधारित ईंधन की कीमत कम होने से वाहन मालिकों को कुल खर्च में राहत मिलेगी।दिल्ली में लॉन्च किए गए E85 ईंधन की कीमत लगभग 82.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य E20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है।इस प्रकार प्रति लीटर लगभग 20 रुपये की बचत संभव है।
किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है। E20 कार्यक्रम के कारण भारत ने लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात में कमी दर्ज की है।इसके चलते करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकी है।साथ ही इथेनॉल उत्पादन से किसानों को लगभग 1.62 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिला है और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
किन वाहनों में लग सकेगी यह किट
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह कन्वर्जन किट BS4 और BS6 मानक वाले चारपहिया वाहनों के लिए विकसित की जा रही है।दोपहिया वाहनों पर अभी इसका परीक्षण नहीं हुआ है, हालांकि विदेशों में मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के लिए भी ऐसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर भारत में दोपहिया वाहनों के लिए भी परीक्षण किए जा सकते हैं।
कितनी होगी कीमत
जब यह किट विदेश से आयात की गई थी, तब इसकी कीमत लगभग 50 हजार रुपये थी।लेकिन यदि सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण भारत में स्थानीय स्तर पर शुरू होता है तो इसकी कीमत काफी कम हो सकती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर इसकी कीमत 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच रह सकती है।
सरकार को भेजी गई रिपोर्ट
किट के परीक्षण के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है।सुझाव दिया गया है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और अन्य नियामक संस्थाओं के माध्यम से इसका आधिकारिक परीक्षण कराया जाए।इसके बाद भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों और आवश्यक नियमों के तहत इसे मंजूरी देकर बाजार में उतारा जा सकता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव
यदि सरकार इस तकनीक को मंजूरी देती है और स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होता है तो यह भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।इससे करोड़ों पुराने वाहन भविष्य के इथेनॉल आधारित ईंधन के अनुरूप बन सकेंगे, ईंधन लागत कम होगी, आयातित तेल पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।