ऊंचे बोनट वाली गाड़ियां बन रहीं जानलेवा
अमेरिका में हुई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि ऊंचे बोनट वाली एसयूवी और पिकअप वाहनों की बढ़ती संख्या पैदल यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। अध्ययन के अनुसार 2016 से 2024 के बीच ऐसे वाहनों के कारण हजारों अतिरिक्त मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन डिजाइन में यात्रियों की सुरक्षा पर तो ध्यान दिया गया, लेकिन पैदल चलने वालों की सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली। भारत में भी बड़ी एसयूवी गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह रिपोर्ट चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 जून 2026
अमेरिका की स्टडी ने बढ़ाई चिंता
सड़क पर बड़ी और शक्तिशाली दिखने वाली एसयूवी गाड़ियां आज दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। भारत में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी एसयूवी और ऊंचे बोनट वाली गाड़ियों की बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन अमेरिका में हुई एक नई स्टडी ने इन वाहनों से जुड़े एक गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है।अध्ययन में पाया गया है कि गाड़ियों के बोनट की बढ़ती ऊंचाई पैदल यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन निर्माताओं ने वर्षों तक कार के अंदर बैठे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने पर काम किया, लेकिन सड़क पर चलने वाले पैदल लोगों की सुरक्षा को उतनी प्राथमिकता नहीं मिली।
क्या है बोनट की ऊंचाई और क्यों बढ़ रहा खतरा
बोनट वाहन का वह अगला हिस्सा होता है जिसके नीचे इंजन लगा होता है। आधुनिक एसयूवी और पिकअप वाहनों में यह हिस्सा पहले की तुलना में काफी ऊंचा हो गया है।जब कोई ऊंचे बोनट वाली गाड़ी किसी पैदल व्यक्ति से टकराती है तो टक्कर का प्रभाव सीधे उसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर पड़ता है। इससे व्यक्ति वाहन के ऊपर उछलने के बजाय सड़क पर जोर से गिर जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की कठोर सतह पर गिरने से सिर, गर्दन और छाती में गंभीर चोट लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि कम गति पर होने वाले हादसे भी कई बार घातक साबित हो जाते हैं।
आठ वर्षों में तीन हजार से अधिक अतिरिक्त मौतें
न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा किए गए विश्लेषण में दुर्घटना रिकॉर्ड, वाहन पंजीकरण आंकड़ों और अन्य तकनीकी सूचनाओं का अध्ययन किया गया।रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 से 2024 के बीच ऊंचे बोनट वाले वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण लगभग 3,000 अतिरिक्त मौतें हुईं। शोधकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है क्योंकि कई दुर्घटनाएं आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज ही नहीं हो पातीं।अध्ययन के अनुसार यदि वाहनों का आकार और डिजाइन शुरुआती 2000 के दशक जैसा बना रहता तो हर वर्ष 200 से 400 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
एक इंच ऊंचाई भी बढ़ाती है खतरा
स्टडी में सामने आया कि वाहन के बोनट की ऊंचाई में हर एक इंच की बढ़ोतरी पैदल व्यक्ति की मौत की आशंका को औसतन 2.8 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।शोधकर्ताओं ने विभिन्न परिस्थितियों का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला कि यदि आधुनिक वाहनों के बोनट कुछ इंच कम ऊंचे होते तो 2016 से 2024 के बीच 2,600 से 3,000 से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी।यह निष्कर्ष वाहन डिजाइन और सड़क सुरक्षा के बीच सीधे संबंध को दर्शाता है।
ब्लाइंड स्पॉट भी बन रहा बड़ी समस्या
विशेषज्ञों ने केवल ऊंचे बोनट को ही समस्या नहीं बताया है। आधुनिक वाहनों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए मोटे ए-पिलर लगाए जाते हैं। ए-पिलर वाहन के आगे की विंडशील्ड को सहारा देने वाला ढांचा होता है।हालांकि यह संरचना वाहन के पलटने जैसी स्थिति में यात्रियों को सुरक्षा देती है, लेकिन इसके कारण चालक की दृश्यता कम हो जाती है। इससे ब्लाइंड स्पॉट यानी ऐसा क्षेत्र जहां चालक को सामने या किनारे की वस्तुएं दिखाई नहीं देतीं, बढ़ जाता है।भारत में भी कई वाहन मालिक इस समस्या की शिकायत करते रहे हैं कि चौड़े ए-पिलर के कारण मोड़ लेते समय सामने से आने वाले वाहन, पैदल यात्री या अन्य वस्तुएं आसानी से दिखाई नहीं देतीं।
पिकअप ट्रकों में स्थिति और गंभीर
अमेरिका में पिकअप ट्रकों का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। अध्ययन में पाया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इन वाहनों के आकार और डिजाइन में बड़ा बदलाव आया है।कुछ मॉडलों में चालक के सामने बनने वाले ब्लाइंड स्पॉट लगभग दोगुने हो गए हैं। इसका मतलब है कि चालक के लिए वाहन के सामने खड़े व्यक्ति या किसी छोटे बच्चे को देख पाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट
भारत में एसयूवी वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। लगभग हर वाहन निर्माता कंपनी बड़े आकार और ऊंचे बोनट वाले मॉडल बाजार में उतार रही है।ऐसे में अमेरिका की यह स्टडी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में पहले से ही सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। यदि वाहन डिजाइन में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया तो भविष्य में यह चुनौती और बढ़ सकती है।
सड़क सुरक्षा पर नए सिरे से सोचने की जरूरत
यह अध्ययन एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या वाहन सुरक्षा केवल वाहन के अंदर बैठे यात्रियों तक सीमित रहनी चाहिए या सड़क पर चलने वाले पैदल यात्री, साइकिल चालक और दोपहिया वाहन चालक भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। वाहन निर्माताओं, नियामक एजेंसियों और सरकारों को मिलकर ऐसे मानक विकसित करने होंगे जो वाहन में बैठे लोगों के साथ-साथ सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकें।जैसे-जैसे बड़ी एसयूवी और भारी वाहनों का चलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों और वाहन डिजाइन मानकों की समीक्षा करना समय की आवश्यकता बनती जा रही है।