हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल बंटवारे पर समझौता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक के दौरान हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर ऐतिहासिक MoU साइन किया गया। इस समझौते के तहत मानसून के दौरान राजस्थान को हथिनी कुंड बैराज से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी मिलेगा।

हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल बंटवारे पर समझौता

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 जून 2026

अमित शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक MoU साइन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को कर्तव्य भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें हरियाणा और राजस्थान सरकारों के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर ऐतिहासिक समझौते पर MoU साइन किया गया।

उच्च स्तरीय बैठक में कई बड़े नेता रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार यह समझौता लंबे समय से लंबित 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड (UYRB) समझौते को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है।

32 साल पुराने समझौते को मिली नई दिशा

1994 में यमुना बेसिन के राज्यों के बीच जल बंटवारे पर सहमति बनी थी, लेकिन नहर और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका था। अब नए समझौते के तहत इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

राजस्थान को मिलेगा मानसून का पानी

नए MoU के अनुसार मानसून के महीनों में हथिनी कुंड बैराज से राजस्थान को उसका हिस्सा भूमिगत जल पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य में जल संकट को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

जल प्रबंधन और सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते के लागू होने से दोनों राज्यों के बीच जल प्रबंधन बेहतर होगा और पानी की बर्बादी को रोकने में भी मदद मिलेगी। साथ ही रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं में भी तेजी आने की संभावना है।

यमुना जल बंटवारे की पृष्ठभूमि

यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर 12 मई 1994 को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच समझौता हुआ था। बाद में वर्ष 2000 में उत्तराखंड भी इसमें शामिल हुआ। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर यह नया समझौता एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।