असम में बकरीद से पहले बड़ा फैसला, मस्जिद समितियों ने गाय की कुर्बानी पर लगाई रोक
असम में बकरीद से पहले कई मस्जिद समितियों ने गाय की कुर्बानी नहीं करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और कानून के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
दि राइजिंग न्यूज | असम | 24 मई 2026
असम में आगामी बकरीद को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। राज्य के कई जिलों की मस्जिद समितियों ने इस बार ईद-उल-अजहा के मौके पर गाय की कुर्बानी नहीं करने का ऐलान किया है। इस फैसले को लेकर पूरे राज्य में चर्चा तेज हो गई है और इसे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मस्जिद समितियों के इस निर्णय की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे समाज में भाईचारा मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं का सम्मान करना और कानून का पालन करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
बकरीद से पहले बढ़ी प्रशासन की सतर्कता
राज्य सरकार और प्रशासन बकरीद को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अफवाह या तनाव फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी इसी बीच धुबरी के पूर्व विधायक अली अकबर मियां की गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर एक विवादित पोस्ट साझा की थी, जिसमें कुर्बानी में हस्तक्षेप करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। साथ ही मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है।
मुख्यमंत्री बोले- ऐसे फैसले बढ़ाते हैं सामाजिक एकता
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मस्जिद समितियों द्वारा लिया गया यह फैसला केवल कानूनी दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और त्योहारों को शांति और भाईचारे के साथ मनाना चाहिए। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी को भी माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
मस्जिद समितियों के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच भी बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने इसे समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला कदम बताया है, जबकि कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक मामलों में बढ़ते दबाव से जोड़कर देखा है। हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल राज्य में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सभी समुदायों के लोग मिलकर त्योहार की तैयारियों में जुटे हुए हैं।