ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 450 अंक टूटा, निफ्टी भी लुढ़का

मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 450 अंक टूट गया जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 450 अंक टूटा, निफ्टी भी लुढ़का

दि राइजिंग न्यूज मुंबई 3 जून 2026


शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में डर का माहौल

भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया और प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे आ गए। सेंसेक्स में लगभग चार सौ पचास अंकों की गिरावट दर्ज की गई जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ। निफ्टी भी कमजोर होकर नीचे फिसल गया और पूरे बाजार में लाल निशान छा गया।लगातार दूसरे दिन आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। बाजार में किसी भी तरह की मजबूती के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। वैश्विक कारणों से घरेलू निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।


ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव बना मुख्य कारण

मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब वैश्विक संकट का रूप ले रहा है। दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। इसी वजह से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।वैश्विक स्तर पर यह स्थिति आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रही है। युद्ध की आशंका के कारण बड़े निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर जा रहे हैं। इसका सीधा असर विकासशील देशों के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।


कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बढ़ी चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग सत्तानवे डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यह वृद्धि वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का परिणाम है।भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो जाती है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और शेयर बाजार पर दबाव आता है।


एशियाई और वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट का असर देखने को मिला है। जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी बिकवाली का दबाव रहा। वैश्विक निवेशक अस्थिरता के कारण सतर्क हो गए हैं।अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए जिससे वैश्विक बाजारों में नकारात्मक माहौल बन गया है।


डॉलर और रुपये में उतार-चढ़ाव जारी

विदेशी मुद्रा बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हुआ है और इसमें लगातार दबाव देखा जा रहा है। वैश्विक तनाव के कारण डॉलर की मांग बढ़ रही है।रुपये की कमजोरी का असर भी शेयर बाजार पर पड़ता है क्योंकि विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं। इससे पूंजी बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ जाता है।


निवेशकों की रणनीति में बदलाव

बाजार में गिरावट के बीच निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। जोखिम वाले शेयरों में बिकवाली बढ़ गई है और नकदी रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। लंबी अवधि के निवेशक भी फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


अमेरिकी और एशियाई बाजारों का बहुत बुरा हाल

भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक बाजारों की मंदी का भी बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। कल रात अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें डाऊ जोन्स ६२०.७२ अंक टूट गया और नैस्डेक भी २४० अंकों के बड़े नुकसान के साथ बंद हुआ। ईरान द्वारा कुवैत हवाई अड्डे पर किए गए हालिया हमलों के बाद अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच जो सीधी झड़पें हुई हैं, उसने एशियाई बाजारों को भी पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।

विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की स्थिति और रुपया

दुनिया की छह सबसे प्रमुख और ताकतवर मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स आज शून्य दशमलव शून्य नौ प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ ९९.४५ के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में भारतीय करेंसी यानी रुपये पर भी बहुत ज्यादा दबाव साफ देखा जा सकता है। बीते सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शून्य दशमलव चार पांच प्रतिशत तक कमजोर होकर ९५.७१ के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।

आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगी। यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ता है तो बाजार पर और दबाव आ सकता है।वहीं अगर स्थिति में सुधार होता है तो बाजार में रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी भी बड़े कदम से बच रहे हैं।