ट्रंप की धमकी से अटकी ईरान वार्ता

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता उस समय तनावपूर्ण हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता बीच में छोड़ दी। लेबनान में युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहे।

ट्रंप की धमकी से अटकी ईरान वार्ता

दि राइजिंग न्यूज़ | ज्यूरिख | 22 जून 2026

स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान बढ़ा तनाव

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता एक बार फिर तनाव के दौर में पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पहले दौर की बातचीत के दौरान विरोध जताते हुए बैठक कक्ष छोड़ दिया।ईरान ने ट्रंप की टिप्पणियों को वार्ता के माहौल के विपरीत बताया और इसे कूटनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम करार दिया। हालांकि बाद में पहले दौर की चर्चा पूरी हुई, लेकिन अगले चरण की वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

संयुक्त फोटो और हाथ मिलाने से किया इनकार

वार्ता शुरू होने से पहले आयोजकों ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक मुलाकात, हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर की व्यवस्था की थी। लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया।ईरानी पक्ष ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष औपचारिक आपत्ति भी दर्ज कराई और ट्रंप की टिप्पणियों पर असंतोष व्यक्त किया।

लेबनान में युद्धविराम को बनाया प्रमुख शर्त

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में पूर्ण युद्धविराम के बिना आगे की वार्ताओं में शामिल होना संभव नहीं होगा। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मेहदी गोरबनजादेह ने कहा कि जब तक लेबनान की स्थिति का समाधान नहीं होता, तब तक अन्य मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित किए बिना किसी व्यापक समझौते पर आगे बढ़ना कठिन होगा।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी तल्खी

वार्ता शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित समूहों को रोकना होगा। उन्होंने ऐसा नहीं होने पर और बड़े सैन्य हमले की संभावना जताई।इसके अलावा ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी सख्त रुख अपनाया और कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है।इन बयानों के बाद वार्ता स्थल पर तनाव और बढ़ गया तथा ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अस्थायी रूप से बातचीत छोड़ दी।

ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणियों के जवाब में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि उनका देश अमेरिकी धमकियों को गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि यदि धमकियों का प्रभाव होता तो अमेरिका को वर्तमान स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।गालिबाफ ने यह भी कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी संभावित कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और देश अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है।

प्रतिबंधों और फ्रीज फंड पर हुई चर्चा

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार पहले दौर की वार्ता में युद्ध समाप्त करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।सूत्रों के मुताबिक ईरानी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत संबंधी मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हुई है। इसके साथ ही दुनिया भर के बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया।

छह अरब डॉलर की वापसी का दावा

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वार्ता से पहले कहा कि समझौते की शर्तें ईरान के हितों के अनुरूप हैं और इसके सकारात्मक परिणाम जल्द सामने आ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कतर में फ्रीज किए गए लगभग छह अरब डॉलर इस समझौते के तहत ईरान को वापस मिल सकते हैं।राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जिन मुद्दों पर पहले अमेरिका सख्त रुख अपनाता था, अब उन्हीं मामलों को ईरानी जनता के अधिकार के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

परमाणु बम नहीं चाहता ईरान

मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान परमाणु बम विकसित नहीं करना चाहता और यह देश की आधिकारिक नीति के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की मुख्य चिंता परमाणु हथियारों को लेकर है और इस विषय पर ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है।हालांकि पहले दौर की बातचीत के बावजूद ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य की वार्ताओं की दिशा काफी हद तक लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय संघर्षों में होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।