टीएमसी में बड़ी बगावत, 20 सांसदों ने NDA समर्थन का किया दावा

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के बागी सांसदों के एक गुट ने NDA को समर्थन देने का दावा करते हुए लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दे दी है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग 20 सांसदों ने अलग गुट बनाने और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजने का दावा किया है।

टीएमसी में बड़ी बगावत, 20 सांसदों ने NDA समर्थन का किया दावा

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 जून 2026

टीएमसी में बढ़ा सियासी संकट

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा चुनाव में झटके के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह विवाद कोलकाता से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुका है। पार्टी के बागी सांसदों के एक गुट ने केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन करने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। बागी सांसदों का दावा है कि उनके साथ लगभग 20 लोकसभा सांसद हैं और वे लोकसभा में अलग पहचान के साथ अपनी राजनीतिक भूमिका तय करना चाहते हैं।

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती

बागी सांसदों ने केवल NDA को समर्थन देने की बात ही नहीं कही है बल्कि लोकसभा में पार्टी नेतृत्व को भी चुनौती दी है। वर्तमान में अभिषेक बनर्जी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं, लेकिन बागी गुट अब वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को नेता के रूप में देखना चाहता है। जानकारी के अनुसार बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत कराने का दावा किया है। उनका कहना है कि लोकसभा में नया समूह बनाकर वे अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करना चाहते हैं।

दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक

सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के 14 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ी टूट हो सकती है। इसके तुरंत बाद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि लगभग 20 सांसद NDA का समर्थन करने के पक्ष में हैं।

लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया पत्र

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके सहित लगभग 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सोच समझकर लिया गया है और यह जनता के जनादेश के अनुरूप है। उनके अनुसार पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति अब खुलकर सामने आ गई है।

विधायकों वाला फार्मूला अपनाने की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों ने वही रणनीति अपनाने की कोशिश की है जो पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में देखने को मिली थी। विधानसभा चुनाव के बाद लगभग 60 विधायकों के एक समूह ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित कर दिया था। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने उस समूह को विधानसभा में असली टीएमसी के रूप में मान्यता भी दी थी। अब सांसदों का बागी गुट भी इसी तरह लोकसभा में अपनी अलग पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

काकोली घोष बनीं बगावत का चेहरा

बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस समय पार्टी के भीतर विद्रोह का प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं। विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था और बाद में संगठन के अन्य पदों से भी दूरी बना ली थी। हालांकि वे अभी भी लोकसभा सांसद हैं और औपचारिक रूप से पार्टी नहीं छोड़ी है। उन्होंने कई बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठाए हैं और संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जाहिर की है।

पार्टी में भ्रष्टाचार के आरोप

बागी सांसद डॉ शर्मिला सरकार ने भी पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर भ्रष्टाचार और गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है। उनके अनुसार पुराने नेताओं की अनदेखी की जा रही थी और संगठन में कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। शर्मिला सरकार ने कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान निष्क्रिय रहे नेताओं को लेकर एक आंतरिक रिपोर्ट पार्टी को सौंपी थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय रिपोर्ट उन्हीं लोगों तक पहुंचा दी गई जिनके खिलाफ शिकायत की गई थी।

अलग गुट बनाने का दावा

डॉ शर्मिला सरकार ने कहा कि काकोली घोष और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में एक अलग गुट बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल इस गुट के साथ 20 सांसद हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि वे तृणमूल कांग्रेस को पूरी तरह छोड़ नहीं रहे हैं बल्कि पार्टी के भीतर ही अलग समूह के रूप में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।

NDA के साथ जाने का तर्क

बागी सांसदों का कहना है कि जनता ने जो जनादेश दिया है, उसे स्वीकार करना चाहिए और भविष्य की राजनीति विकास तथा स्थिरता के आधार पर होनी चाहिए। उनका मानना है कि NDA के साथ जुड़ना राजनीतिक रूप से बेहतर विकल्प है और इससे क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिल सकती है।

ममता खेमे ने किया दावा खारिज

दूसरी ओर ममता बनर्जी के समर्थक सांसदों ने पार्टी में बड़ी टूट की बात को खारिज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि बागी सांसदों की संख्या 20 नहीं बल्कि केवल 13 है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

तृणमूल कांग्रेस में उभरा यह संकट पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। यदि बागी सांसदों के दावे सही साबित होते हैं तो यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। फिलहाल सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजे गए कथित पत्र और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक रहता है या तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन का कारण बनता है।