मुंशी प्रेमचंद के 'मैकू' का परिवार बना रहा दीया:परिजन बोले- हमारे काम से 10 हजार घरों में होगी त्योहार पर रोशनी, हमें नहीं मिला उजाला
वाराणसी में आज दिवाली का त्योहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस त्योहार में काशी और देश के बड़े उपन्यासकारों में शामिल मुंशी प्रेमचंद का नाम भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने घर काम करने वाले मैकू प्रजापति पर कहानी लिखी और उसे अमर कर दिया। वाराणसी के पांडेयपुर में मैकू के परिजन आज भी उनका पुश्तैनी काम कर रहे हैं और दीये बना रहे हैं। महंगाई के बीच सिर्फ सरकारी मदद के नाम पर इस परिवार को इल्क्ट्रिक चाक मिला है। साथ ही राशन भी मिलता है। ऐसे में दूसरों के घरों को इस दीपावली जगमग करने के लिए दीया गढ़ रहे मैकू प्रजापति के परिजनों से दैनिक भास्कर ने बात की और जाना की किस तरह से वो अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट... हमारा जीवन बस बीत रहा है
मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास मैकू के पात्र मैकू प्रजापति के चार बेटे थे। खल्लू प्रजापति सबसे बड़े जिनका देहांत हो गया है। इसके बाद कैलाश, राजेंद्र और जित्तू प्रजापति हैं। दैनिक भास्कर की टीम जब नई बस्ती स्थित मैकू प्रजापति के घर पहुंची तो वहां उनके सबसे छोटे बेटे जित्तू प्रजापति मिले। जो अब मिटटी का काम छोड़ चुके हैं। शाम में अपने घर की छोटी सी दुकान में पकौड़ी बेचते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। हम लोगों को वृद्धा पेंशन भी नहीं है। बस किसी तरह दाल रोटी चल रही है। मुंशी प्रेमचंद से जुड़ा है नाम
जित्तू प्रजापति ने बताया - मुंशी प्रेमचंद के यहां हमारे पिताजी काम करते थे। जब तक दादी जिंदा थी। आना-जाना था। लेकिन फिर ऐसा कुछ हुआ नहीं। हां उनकी जयंती पर बुलाया जाता है तो हम लोग जाते हैं। उनसे जुड़े होने पर भी कोई लाभ नहीं है। कोई पेंशन नहीं और न कोई सहारा हम लोगों के पास है। कोई व्यवस्था नहीं हम लोगों के पास है। एक आदमी का पैसा दिए ₹500 की हमारी पेंशन बनवा दीजिये पर वो भी पैसा खाकर बैठ गए आज तक काम नहीं हुआ है। बनाया 30 हजार दीया पर बिका नहीं
पोते राजेंद्र की पत्नी रुक्मणि देवी चाक पर दीये गढ़ रही हैं। उन्होंने कहा - हम लोगों ने इस बार 30 हजार के करीब दीये बनाए थे। पर बारिश ने सब नुक्सान कर दिया। इसके अलावा महंगाई की वजह से लोग जो 1000 दिया खरीदने वाले थे अब वो 200 ही खरीद रहे हैं। इससे हमारा नुक्सान हो रहा है। सरकार ने बस इल्क्ट्रिक चाक दे दिया है। इसके अलावा कोई व्यवस्था हम लोगों के लिए नहीं है। ऐसे में क्या ही करेंगे। हमारे पास बस लड़कियां हैं। उनकी शादी करनी है पर पैसे नहीं है की शादी करें। मुंशी जी से रिश्ता पर कोई पूछता नहीं
रुक्मणि ने कहा - हमारा रिश्ता मुंशी जी से है लेकिन कोई अधिकारी और कोई भी हम लोगों को पूछता नहीं। आप लोग ही आ जाते हैं साल में एक बार। हमें सुविधा के नाम पर यह चाक और हर महीने राशन मिलता है। हम लोगों की जिंदगी में उजाला कब आएगा इसके लिए हम पछता रहे हैं। बिजलिया का बिल देवे के बा
पोते कैलाश की पत्नी रामा देवी ने कहा -महंगाई का बहुत असर है 30 हजार दीया बना था पर अभी सब रखा हुआ है। सरकार से हमें कोई सुविधा नहीं है। खाली चाक मिला है। लेकिन ऊ चली त बिजलिया का बिल देवे का बा न। हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है। इसलिए हम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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