नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ सबसे आगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के मामले में पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। 26 मई 2014 से शुरू हुए उनके कार्यकाल ने 4398 दिनों का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 10 जून 2026
सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने अब 4398 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लिया है और इस मामले में उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ दिया है।
नेहरू का रिकॉर्ड टूटा
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 मई 1952 को पहली बार आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और लगातार 4397 दिनों तक इस पद पर बने रहे थे। नरेंद्र मोदी ने इस आंकड़े को पार करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। हालांकि नेहरू 15 अगस्त 1947 से प्रधानमंत्री रहे थे, लेकिन 1952 के पहले तक उन्हें अंतरिम सरकार का प्रमुख माना जाता है। इसी कारण निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल की अलग गणना की जाती है।
लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी
नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला था। इसके बाद 2019 और फिर 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटकर उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार तीन आम चुनाव जीतना और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाए रखना मोदी की लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता का संकेत है।
भाजपा का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव
मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत की है। वर्तमान में देश के अनेक राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पार्टी का प्रभाव लगातार बढ़ा है।
विकसित भारत 2047 पर फोकस
मोदी सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य विकसित भारत 2047 माना जा रहा है। स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई बड़े कार्यक्रमों पर काम किया जा रहा है। सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष क्षेत्र और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है।
अर्थव्यवस्था को तीसरे स्थान तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे, उद्योग, डिजिटल भुगतान प्रणाली, रेलवे आधुनिकीकरण और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है। यदि विकास की वर्तमान गति बनी रहती है तो भारत जर्मनी और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है।
स्टार्टअप और स्पेस सेक्टर पर जोर
पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है। सरकार के अनुसार देश में स्टार्टअप की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है। साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर स्पेस इकोनॉमी का आकार कई गुना बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है।
विदेश नीति में नई दिशा
मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हुई है। वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने से लेकर अंतरराष्ट्रीय विवादों में शांति की अपील तक भारत ने कई मुद्दों पर प्रमुख भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी को भी सरकार लगातार मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
नेहरू और मोदी की विकास दृष्टि
भारत के विकास की यात्रा में नेहरू और मोदी दोनों की भूमिकाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, शिक्षा और औद्योगिक ढांचे की नींव रखी। वहीं मोदी सरकार उसी आधार को आधुनिक तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
आगे की राह आसान नहीं
हालांकि रिकॉर्ड बनाने के बावजूद मोदी सरकार के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। रोजगार सृजन, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, गठबंधन राजनीति और सामाजिक विकास जैसे मुद्दों पर सरकार की परीक्षा जारी रहेगी। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में देश कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इस लंबे राजनीतिक सफर को किस नई उपलब्धि तक पहुंचाते हैं।