नीट विवाद पहुंचा नए मोड़ पर, परीक्षा प्रणाली बदलने की मांग

नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा को पूरी तरह संगणक आधारित बनाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी परीक्षा प्रबंधन को लेकर नाराजगी जताई है और केंद्र व एजेंसियों से जवाब मांगा है। इस मामले पर अब देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं।

नीट विवाद पहुंचा नए मोड़ पर, परीक्षा प्रणाली बदलने की मांग

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 1 जून 2026

देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट यूजी को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है, जिसमें केवल दोबारा परीक्षा या जांच की मांग नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को बदलने की मांग उठाई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक परीक्षा पद्धति में बड़े बदलाव नहीं किए जाएंगे तब तक पेपर लीक और धांधली जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। याचिका में मांग की गई है कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा को पारंपरिक कागजी प्रणाली से हटाकर पूरी तरह संगणक आधारित बनाया जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और वितरण की प्रक्रिया ही सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो रही है, जिसका फायदा उठाकर पेपर लीक करने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कुछ याचिकाओं में एजेंसी के पुनर्गठन या उसके स्थान पर नई और अधिक पारदर्शी संस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे विवाद परीक्षा प्रणाली में गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं। चिकित्सा संगठनों और छात्र समूहों का कहना है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण परीक्षा तंत्र में सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका आरोप है कि बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां छात्रों का भरोसा कमजोर कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों और अनुभवों से पर्याप्त सीख नहीं ली गई। अदालत ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और जांच एजेंसियों से जवाब मांगा है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा है कि परीक्षा सुरक्षा को लेकर क्या सुधार किए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

संगणक आधारित परीक्षा की मांग तेज

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि परीक्षा पूरी तरह संगणक आधारित होगी तो प्रश्नपत्रों के भौतिक वितरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे पेपर लीक की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। इसी आधार पर कई छात्र संगठन और विशेषज्ञ भी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी बदलाव का समर्थन कर रहे हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने भी सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि भविष्य में नीट को संगणक आधारित प्रारूप में आयोजित करने की दिशा में विचार किया जा रहा है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि परीक्षा सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नए उपाय लागू किए गए हैं।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी

पेपर लीक मामले की जांच अभी भी जारी है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं और मामले से जुड़े नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर लीक का जाल कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है। इस बीच लाखों छात्र और अभिभावक सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि अदालत का फैसला परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकता है।

छात्रों में बढ़ी चिंता

लगातार विवादों और कानूनी लड़ाई के कारण छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत की है और वे चाहते हैं कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा सुधार और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।