नए वकीलों को COP के लिए 6 महीने ट्रेनिंग जरूरी:यह नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होगा; सीनियर वकील ही दे सकेंगे प्रमाण पत्र

Oct 27, 2026 - 19:17
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नए वकीलों को COP के लिए 6 महीने ट्रेनिंग जरूरी:यह नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होगा; सीनियर वकील ही दे सकेंगे प्रमाण पत्र
प्रयागराज बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने नए अधिवक्ताओं के लिए सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) जारी करने के नियमों में बदलाव किया है। अब पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों को सीओपी के लिए आवेदन करने से पहले छह महीने तक किसी अनुभवी अधिवक्ता के साथ लॉ ट्रेनी के रूप में काम करना होगा। यह नियम एक नवंबर 2026 से लागू होगा। हालांकि, एक नवंबर से पहले सीओपी के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की 10 अक्टूबर 2026 को हुई सामान्य बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके तहत पंजीकरण की तारीख से छह महीने तक ऐसे सीनियर अधिवक्ता के साथ काम करना अनिवार्य होगा, जिसकी वकालत का अनुभव कम से कम 10 साल हो और जिसके पास सीओपी भी हो। सीनियर अधिवक्ता से लेना होगा प्रमाण पत्र नए नियम के अनुसार, छह महीने तक लॉ ट्रेनी के रूप में काम करने के बाद अभ्यर्थी को संबंधित सीनियर अधिवक्ता से प्रमाण पत्र लेना होगा। यह प्रमाण पत्र अधिवक्ता के लेटर हेड पर जारी किया जाएगा। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के किसी सदस्य से प्रमाण पत्र का सत्यापन कराना होगा। सीओपी के लिए आवेदन करते समय इस प्रमाण पत्र को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रमाण पत्र के बिना अभ्यर्थी को सीओपी जारी नहीं किया जाएगा। यानी नए नियम के तहत केवल पंजीकरण करा लेना सीओपी प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अभ्यर्थी को छह महीने की लॉ ट्रेनिंग और उसका प्रमाण भी देना होगा। एक साल में दो अभ्यर्थियों को ही दे सकेंगे प्रमाण पत्र बार काउंसिल ने सीनियर अधिवक्ताओं के लिए भी सीमा तय की है। 10 साल या उससे अधिक का अनुभव रखने वाला कोई भी अधिवक्ता एक साल में अधिकतम दो लॉ ट्रेनी अभ्यर्थियों को ही निर्धारित प्रमाण पत्र जारी कर सकेगा। यदि कोई अधिवक्ता एक साल में दो से अधिक अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र जारी करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। बार काउंसिल ने यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिलने के बाद लागू करने का निर्णय लिया है। नए नियम का उद्देश्य नए अधिवक्ताओं को अनुभवी वकीलों के साथ काम करने का अवसर देना और वकालत के व्यावहारिक अनुभव को सीओपी की प्रक्रिया से जोड़ना है।

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