ओवैसी बोले-जब तक अब्दुल नेता नहीं बनेगा...मसला हल नहीं होगा:शामली में कहा- हमारी पार्टी योगी को दोबारा सीएम बनते नहीं देखना चाहती
शामली में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कैराना में जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरी पार्टियां भी विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारती हैं, तो उनसे सवाल क्यों नहीं किए जाते? केवल एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने पर ही भाजपा को फायदा पहुंचाने के आरोप क्यों लगाए जाते हैं? उन्होंने कहा, “जब तक अब्दुल नेता नहीं बनेगा, इन मसलों का हल नहीं होगा।” ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अल्पसंख्यक समाज की भागीदारी और नेतृत्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समाज का अपना राजनीतिक नेतृत्व होने पर ही उसके मुद्दों का प्रभावी समाधान हो सकता है। उन्होंने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं और जमीन से जुड़े विवादों समेत कई मुद्दों का जिक्र किया। सपा-कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों पर उठाए सवाल ओवैसी ने पिछले विधानसभा चुनावों में विभिन्न दलों की ओर से उतारे गए उम्मीदवारों की संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने करीब 380, कांग्रेस ने 400, बसपा ने 400 और आम आदमी पार्टी ने करीब 300 उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद इन पार्टियों से यह सवाल नहीं किया जाता कि उनके चुनाव लड़ने से किसे फायदा होगा। उन्होंने सवाल किया कि एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने पर ही उसे निशाना क्यों बनाया जाता है? उन्होंने भाजपा की साल- 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 में हुई चुनावी जीत का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए। बिहार और महाराष्ट्र का दिया उदाहरण ओवैसी ने बिहार में एआईएमआईएम के चार विधायकों के दूसरे दल में जाने और महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अलग-अलग घटनाओं पर अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इंडिया गठबंधन के घटक दलों से छह सीटें देने की मांग की थी। इनमें राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल थे। ओवैसी ने राजनीतिक परिवारों के सदस्यों की अलग-अलग दलों में मौजूदगी और भाजपा से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में सभी दलों के लिए एक समान मापदंड होना चाहिए। रोजगार, शिक्षा और किसानों के मुद्दे उठाए ओवैसी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों को केवल चुनाव तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं, जमीन के विवादों और इबादतगाहों से जुड़े मामलों पर भी राजनीतिक दलों को आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समाज उन्हें वोट दे, लेकिन अपने अन्य मुद्दों पर सवाल न उठाए। उन्होंने मकानों पर कार्रवाई, मस्जिदों से जुड़े विवाद और लोगों को जेल भेजे जाने के मामलों का भी जिक्र किया। रामपुर में आजम खान का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल किया कि यदि उनकी पार्टी इन मुद्दों को नहीं उठाती, तो क्या दूसरे राजनीतिक दल उनसे मिलने जाते? गठबंधन पर फैसला बाद में उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहती। उन्होंने कहा कि जो दल योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोकना चाहते हैं, एआईएमआईएम उनके साथ जाने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की घोषणा नहीं की। ओवैसी ने कहा कि गठबंधन तय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने के संकेत मिले हैं।
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