125 साल पुराने गुरुद्वारे पर विवाद..
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे के हिस्से को बिना अनुमति ढहाए जाने के बाद भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण की मांग की है। बढ़ते विवाद के बीच पाकिस्तान सरकार ने जांच के आदेश देने के साथ धार्मिक स्थल के पुनर्निर्माण और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 2 जुलाई 2026
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखूपुरा जिले के फर्रुखाबाद में स्थित लगभग 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के एक हिस्से को कथित तौर पर ढहाए जाने की घटना ने भारत और पाकिस्तान के बीच नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह गुरुद्वारा स्थानीय सिख समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी काफी बड़ा है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद भारत ने इसे धार्मिक विरासत पर गंभीर आघात बताते हुए पाकिस्तान सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। भारत ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और इस प्रकार की घटनाएं न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। भारत ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त हिस्से का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
भारत ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से दर्ज कराया कड़ा विरोध
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने की खबर अत्यंत दुखद और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी इमारत को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। भारत ने कहा कि धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा प्रत्येक देश की जिम्मेदारी होती है और इस प्रकार की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बनती हैं।रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुरुद्वारे के हिस्से को गिराए जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की ओर से समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। भारत ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान सरकार से अपेक्षा की कि वह मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे। भारत ने यह भी मांग की कि ऐतिहासिक गुरुद्वारे को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए ताकि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।
बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के ढहाया गया गुरुद्वारा
पाकिस्तान के प्रशासनिक अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई कि एक स्थानीय व्यवसायी ने संबंधित विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना गुरुद्वारे के हिस्से को गिरा दिया। बताया गया कि निर्माण या तोड़फोड़ से पहले संबंधित सरकारी विभागों की अनुमति लेना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यही कारण है कि अब पूरे मामले की प्रशासनिक और कानूनी जांच की जा रही है।जानकारी के अनुसार जब तक स्थानीय सिख समुदाय ने इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया, तब तक संबंधित विभाग ने इस मामले पर कोई औपचारिक संज्ञान नहीं लिया था। विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की जांच शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने किस आधार पर निर्माण स्थल पर कार्रवाई की और क्या इसमें किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही भी शामिल थी।
सिख समुदाय के विरोध के बाद हरकत में आया प्रशासन
गुरुद्वारे के हिस्से को गिराए जाने की जानकारी मिलते ही स्थानीय सिख समुदाय ने प्रशासन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। समुदाय के लोगों का कहना था कि यह केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विरोध बढ़ने के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।प्रदर्शन के दौरान सिख समुदाय ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त हिस्से का जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए। इसके बाद सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और धार्मिक स्थल की गरिमा को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पुनर्निर्माण और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का दिया गया भरोसा
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में रहने वाले सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुरुद्वारे से जुड़े सभी भूमि अभिलेखों और प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तथ्य सामने आने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा ताकि ऐतिहासिक धरोहर को फिर से सुरक्षित किया जा सके। सरकार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी।
भूमि के स्वामित्व और कानूनी स्थिति की होगी विस्तृत जांच
प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिस भूमि पर गुरुद्वारा स्थित है, उसका विवरण संबंधित धार्मिक न्यास विभाग के अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। इसी कारण प्रशासन अब भूमि के स्वामित्व, पंजीकरण और कानूनी स्थिति की विस्तृत जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि का वास्तविक अधिकार किसके पास था और निर्माण अथवा तोड़फोड़ की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई।सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी होने तक उस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य या अन्य गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है। पिछले कई वर्षों में मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी समय-समय पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।भारत ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। भारत का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो इससे अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा की भावना और अधिक बढ़ेगी।
भारत ने रखीं स्पष्ट मांगें
भारत ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा ऐतिहासिक गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त हिस्से का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए। भारत ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।भारत का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल किसी एक समुदाय का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसलिए पाकिस्तान को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए ऐसे ठोस कदम उठाने चाहिए, जिससे अल्पसंख्यकों का विश्वास कायम हो सके और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।