राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: , प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी प्रकरण पर विशेष जांच दल ने 15 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में चढ़ावा प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: , प्रबंधन व्यवस्था  पर  गंभीर सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 24 जून 2026

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गड़बड़ी प्रकरण को लेकर विशेष जांच दल ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। लगभग 15 पन्नों की इस रिपोर्ट में चढ़ावा प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर कई व्यवस्थागत कमियों की ओर संकेत किया गया है, जिससे मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चढ़ावे की व्यवस्था और प्राप्ति के विभिन्न माध्यमों की हुई जांच

विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मंदिर में चढ़ावा मुख्य रूप से दान पात्रों, नकद जमा काउंटरों और ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त होता है। जांच के दौरान इन सभी स्रोतों से प्राप्त धनराशि का परीक्षण किया गया तथा संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए।रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की वास्तविक मात्रा और अभिलेखों में दर्ज आंकड़ों के बीच कई स्थानों पर असंगतियां दिखाई दीं। इसी कारण जांच दल ने संपूर्ण व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई है।

श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे के आंकड़ों में दिखा अंतर

जांच में सामने आया कि सामान्य रूप से प्रत्येक माह लगभग 25 लाख श्रद्धालु राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं महाकुंभ के दौरान यह संख्या एक माह में लगभग एक करोड़ तक पहुंच गई थी। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद कई अवधियों में चढ़ावे की राशि अपेक्षित स्तर से कम दर्ज की गई।विशेष जांच दल ने पाया कि कुछ महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बावजूद चढ़ावे की रकम में समान अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। इस विषय पर पूछताछ के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि उन अवधियों में नोटों की तुलना में सिक्कों का अधिक चढ़ावा प्राप्त हुआ था। हालांकि जांच दल ने इस स्पष्टीकरण को भी परीक्षण के दायरे में रखा है।

प्रति श्रद्धालु औसत चढ़ावे को लेकर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रति श्रद्धालु औसतन 15 से 18 रुपये के बीच चढ़ावा दर्ज किया गया। हालांकि जांच दल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस गणना में सोना, चांदी, आभूषण, अनाज, घी और अन्य वस्तुओं के रूप में प्राप्त दान को शामिल नहीं किया गया है।जांच एजेंसियों का कहना है कि इन वस्तुओं के संबंध में पर्याप्त अभिलेख और सत्यापित साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। इसी कारण इनका मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जा सका। इससे वास्तविक चढ़ावे का सटीक आकलन करना और अधिक जटिल हो गया है।

कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न

विशेष जांच दल की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर में कुछ कर्मचारी ऐसे कार्य करते पाए गए जिनकी नियुक्ति अथवा जिम्मेदारी से संबंधित स्पष्ट लिखित आदेश उपलब्ध नहीं थे। जांचकर्ताओं ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी माना है।रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी बड़े धार्मिक संस्थान में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और अभिलेखीकरण आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता तो जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है और भविष्य में विवादों की संभावना बढ़ जाती है।

चढ़ावा निगरानी व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी

जांच रिपोर्ट में चढ़ावा गणना प्रक्रिया तथा निगरानी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और समितियों की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्तरों पर निगरानी प्रणाली अपेक्षित प्रभावशीलता के साथ कार्य करती हुई नहीं दिखाई दी। विशेष जांच दल ने सुझाव दिया है कि चढ़ावे की गणना, भंडारण और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था के माध्यम से और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद और संदेह की संभावना कम होगी।

कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में

रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच दल ने कहा है कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कुछ व्यक्तियों की जिम्मेदारियों और कार्यों की विस्तृत जांच की आवश्यकता है।हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। वर्तमान रिपोर्ट को प्रारंभिक जांच का हिस्सा बताया गया है और इसमें कई बिंदुओं पर आगे और गहन पड़ताल की सिफारिश की गई है।

पांच वर्षों में संपत्ति वृद्धि को लेकर भी हुई जांच

विशेष जांच दल ने जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति का भी अध्ययन किया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पिछले पांच वर्षों में कुछ व्यक्तियों की संपत्ति और आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।इसी आधार पर संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय स्रोतों की भी समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन आवश्यक है।

साठ से अधिक लोगों से हुई पूछताछ

जांच के दौरान विशेष जांच दल ने 60 से अधिक व्यक्तियों से पूछताछ की। इनमें मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारी, अधिकारी, सुरक्षा कर्मी तथा अन्य संबंधित लोग शामिल रहे। इसके अलावा मंदिर परिसर और चढ़ावा प्रबंधन क्षेत्रों के निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली गई।जांच दल का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह निश्चित रूप से बताना अभी संभव नहीं है कि कथित गड़बड़ी की मात्रा कितनी थी। इसका मुख्य कारण प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा दिए गए चढ़ावे का व्यक्तिगत अभिलेख उपलब्ध न होना है।

अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

प्रारंभिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपते हुए विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करने की बात कही है। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।फिलहाल इस प्रकरण ने देशभर के श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। सभी की निगाहें अब अंतिम जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।