बारुईपुर कांड पर सियासत, ममता को मिलने से रोका

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी को पीड़िता के परिवार से मिलने से रोका गया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इसे उनकी सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है। मामले को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

बारुईपुर कांड पर सियासत, ममता को मिलने से रोका

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 6 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीड़िता के परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके कोलकाता स्थित आवास के बाहर भारी पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था तैनात कर दी गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। इस विवाद के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और यह मामला राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है।

क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। जानकारी के अनुसार बच्ची के लापता होने के बाद उसके परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन अगले दिन उसका शव एक बोरे में बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने की आशंका जताई गई, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।इस घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। लोगों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल शुरू कर दी। इस घटना ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।


ममता बनर्जी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का आरोप

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि ममता बनर्जी पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने के लिए अपने आवास से निकलने वाली थीं, लेकिन उन्हें बाहर जाने से रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके आवास के बाहर बैरिकेड लगाए गए और सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी कर दी गई कि उनका बाहर निकलना मुश्किल हो गया।तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक कारणों से उठाया गया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुख बांटना और उन्हें न्याय का भरोसा देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे रोका नहीं जाना चाहिए।


भारतीय जनता पार्टी ने क्या कहा

भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी के आवास के बाहर की गई सुरक्षा व्यवस्था केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। उनका दावा है कि इस व्यवस्था का पीड़ित परिवार से मुलाकात रोकने से कोई संबंध नहीं था।भारतीय जनता पार्टी के नेता दिलीप घोष ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती इसलिए की गई थी ताकि कोई भी व्यक्ति विरोध प्रदर्शन के दौरान उन पर अंडे या अन्य वस्तुएं फेंककर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब न कर सके। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और अधिक तेज हो गया तथा दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।


आवास के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था

ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास के बाहर रविवार रात से ही अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। सोमवार को भी पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी बनी रही। आवास के आसपास आने-जाने वाले लोगों की निगरानी की जा रही थी और कई स्थानों पर बैरिकेड भी लगाए गए थे।प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह एहतियाती कदम के तौर पर की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। वहीं तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि इस सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य ममता बनर्जी की आवाजाही को सीमित करना था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बढ़ता गया।


घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश

बारुईपुर की इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। लोगों ने बच्ची के साथ हुई कथित दरिंदगी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की। पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया, जिसके चलते पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना के मुख्य आरोपी को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया था। भीड़ ने उसके साथ मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी तथा लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने और इस संवेदनशील घटना का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगा रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मामले को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक जरूरी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना है।


पुलिस की जांच किस दिशा में बढ़ रही है

पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से मिले सबूतों की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने की भी अपील की गई है।


महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बारुईपुर की यह घटना एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और अपराध रोकने के उपायों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज के विभिन्न वर्गों ने बच्ची को न्याय दिलाने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता और त्वरित पुलिस कार्रवाई को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।