राष्ट्रधर्म के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ का विमोचन:सुनील आम्बेकर बोले - जल संरक्षण के लिए समाज की सोच और जीवनशैली बदलनी होगी
लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने कहा कि जल संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं और तकनीकी उपायों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सोच, संस्कार और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा। पानी को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार मानकर संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। वे रविवार को भागीदारी भवन में राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। जखनी और हिवरे बाजार से सीखने की जरूरत आम्बेकर ने बुंदेलखंड के जखनी और महाराष्ट्र के हिवरे बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से जल संकट का समाधान संभव है। उन्होंने युवाओं से सफल मॉडलों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में नदियों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का ध्यान रखना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने की। उन्होंने पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पुनर्जीवित करने और संबंधित साहित्य गांवों तक पहुंचाने पर जोर दिया। पद्मश्री डॉ. पोपटराव पवार ने जल प्रबंधन, फसल नियोजन और ग्रामसभा की भागीदारी को जरूरी बताया। पुस्तक के सातवें संस्करण का भी विमोचन राष्ट्रधर्म के संपादक अशोक वाजपेयी ने बताया कि विशेषांक में जल संरक्षण के सांस्कृतिक विचारों, पारंपरिक प्रणालियों और सफल प्रयासों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुज मिश्रा ने किया, जबकि प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने आभार जताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी की पुस्तक ‘हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल स्रोत’ के सातवें संस्करण का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक कौशल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, मनोज कांत, राज्य सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, डॉ. बी.एन. सिंह, गंगा सिंह, अशोक कुमार दुबे, अशोक केडिया, डॉ. हरनाम सिंह, देवेंद्र अस्थाना, प्रशांत भाटिया, अनिल, डॉ. ओम प्रकाश सिंह और राजकिशोर सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
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