साकेत धाम की रामलीला में सूर्पनखा प्रसंग और लंका दहन:हनुमान जी के पराक्रम से गूंजा जय श्रीराम का जयघोष, दर्शक भक्तिरस में डूबे
उन्नाव के साकेत धाम श्रीरामलीला मैदान में 154वें श्रीरामलीला महोत्सव में शुक्रवार रात सूर्पनखा नासिका भंग और लंका दहन का मंचन हुआ। कलाकारों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत किया। लंका दहन के दृश्य में हनुमान जी के पराक्रम को देखकर दर्शक भक्ति में लीन हो गए। पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। बृजराज राजेश्वरी लीला संस्थान के संस्थापक स्वामी सुरेश ठाकुर बृजवासी के निर्देशन में पंचवटी का प्रसंग दिखाया गया। इसमें सूर्पनखा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। प्रस्ताव अस्वीकार होने पर लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नासिका भंग की। अपमानित सूर्पनखा रावण के पास पहुंची और उसे सीता हरण के लिए उकसाया। लीला के अगले प्रसंग में हनुमान जी माता सीता की खोज करते हुए लंका पहुंचे। उन्होंने अशोक वाटिका में सीता से भेंट कर प्रभु श्रीराम का संदेश दिया। इसके बाद रावण के सैनिकों ने हनुमान जी को बंदी बनाकर दरबार में पेश किया। रावण के कहने पर उनकी पूंछ में आग लगा दी गई। हनुमान जी ने इसी आग से सोने की लंका में आग लगा दी। लंका दहन के दौरान दर्शकों में काफी उत्साह दिखा और परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस मंचन से बुराई पर अच्छाई की जीत, धर्म की रक्षा और प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति का संदेश दिया गया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष संजय राठी, महामंत्री शशांक अवस्थी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश अवस्थी समेत पदाधिकारियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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