स्क्रैप नीति: जानें कितने साल तक चलेंगी गाड़ियां और क्या हैं नए नियम व फिटनेस टेस्ट की पूरी जानकारी

सरकार की नई स्क्रैप नीति के तहत पुरानी और अनफिट गाड़ियों को हटाने के नियम लागू किए गए हैं। 15 से 20 साल पुरानी व्यावसायिक गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट अनिवार्य है और फेल होने पर उन्हें स्क्रैप करना पड़ सकता है। हालांकि विंटेज गाड़ियों को कुछ छूट दी गई है। यह नीति प्रदूषण कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

स्क्रैप नीति: जानें कितने साल तक चलेंगी गाड़ियां और क्या हैं नए नियम व फिटनेस टेस्ट की पूरी जानकारी

दि राइजिंग न्यूज डेस्क |  4 मई 2026

देश में बढ़ते प्रदूषण और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई वाहन स्क्रैप नीति लागू की है। इस नीति के तहत पुरानी और अनफिट गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखना और सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में आधुनिक और स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकता है।

स्क्रैप नीति क्या है

स्क्रैप नीति एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत पुरानी और तकनीकी रूप से कमजोर वाहनों को हटाकर उन्हें रीसाइकिल किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम करना है। तय समय और उम्र पूरी कर चुके वाहनों की जांच की जाती है और यदि वे मानकों पर खरे नहीं उतरते तो उन्हें स्क्रैप करना अनिवार्य हो जाता है। यह नीति पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को भी मजबूत बनाती है।


कितने साल बाद गाड़ी स्क्रैप होगी

नए नियमों के अनुसार पंद्रह से बीस वर्ष पुराने व्यावसायिक और सार्वजनिक परिवहन वाहनों का फिटनेस टेस्ट जरूरी किया गया है। यदि कोई वाहन इस टेस्ट में फेल हो जाता है तो उसे सड़क से हटाना या स्क्रैप करना पड़ सकता है। हालांकि निजी वाहनों पर भी धीरे-धीरे इसी तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर केवल सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन ही चलें।

फिटनेस टेस्ट का महत्व

किसी भी गाड़ी को सीधे स्क्रैप नहीं किया जाता, बल्कि पहले उसका फिटनेस टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट में वाहन की सुरक्षा, इंजन की स्थिति और प्रदूषण स्तर की जांच की जाती है। यदि गाड़ी सभी मानकों पर खरी उतरती है तो उसका रजिस्ट्रेशन फिर से रिन्यू किया जा सकता है और उसे कुछ समय के लिए और चलाने की अनुमति मिल जाती है। इसका उद्देश्य सड़क पर केवल सुरक्षित वाहनों को बनाए रखना है।

विंटेज और पुरानी गाड़ियों का नियम

पचास वर्ष से अधिक पुरानी गाड़ियों को विंटेज श्रेणी में रखा गया है और इन्हें स्क्रैप से छूट दी जा सकती है। हालांकि इनका उपयोग रोजमर्रा के परिवहन के लिए नहीं किया जा सकता। इन्हें केवल प्रदर्शनी, रैली या विशेष आयोजनों में ही चलाने की अनुमति दी जाती है। इससे ऐतिहासिक और क्लासिक गाड़ियों को संरक्षित रखने में मदद मिलती है और ऑटोमोबाइल इतिहास भी सुरक्षित रहता है।


आम लोगों पर असर

इस नीति का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं। उन्हें अपनी गाड़ी की उम्र और स्थिति के अनुसार निर्णय लेना होगा। कई मामलों में फिटनेस टेस्ट और अपग्रेडेशन पर अतिरिक्त खर्च भी आ सकता है। हालांकि लंबे समय में यह नीति सुरक्षित, आधुनिक और किफायती परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी।

दुनिया के देशों में नियम

अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन जैसे देशों में पहले से ही सख्त स्क्रैप और रीसाइक्लिंग नियम लागू हैं। इन देशों में पुरानी गाड़ियों को हटाकर प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जाता है। भारत भी अब इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि वैश्विक मानकों के अनुरूप परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सके।

स्क्रैप नीति का उद्देश्य पुरानी और असुरक्षित गाड़ियों को हटाकर एक आधुनिक और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था तैयार करना है। यह नीति पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और तकनीकी विकास तीनों को मजबूत करती है। आने वाले समय में यह नीति भारत की ऑटोमोबाइल व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है और एक नई दिशा दे सकती है।