ओवैसी का तीखा बयान: "अब घर में घुसकर मारो नहीं, घर में घुसकर बैठ जाओ"

दि राइजिंग न्यूज। 1 मई 2025 । हैदराबादः  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। इस बीच, एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई की वकालत की है। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा, "बीजेपी कहती है 'घर में घुसकर मारेंगे', लेकिन अब वक्त आ गया है कि घर में घुसकर बैठ जाओ।"

ओवैसी का तीखा बयान: "अब घर में घुसकर मारो नहीं, घर में घुसकर बैठ जाओ"

दि राइजिंग न्यूज। 1 मई 2025 । हैदराबादः 

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। इस बीच, एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई की वकालत की है। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा, "बीजेपी कहती है 'घर में घुसकर मारेंगे', लेकिन अब वक्त आ गया है कि घर में घुसकर बैठ जाओ।"

ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान से आ रहे आतंकी हमले रुकने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संसद पहले ही यह संकल्प ले चुकी है कि पीओके भारत का हिस्सा है, और अब वक्त आ गया है कि सरकार ठोस कदम उठाए।

"हर बार हमला होता है, और फिर सिर्फ जवाबी बयान आते हैं। अब 'टेरर' खत्म होना चाहिए, सिर्फ हमला नहीं—हथियारबंद समाधान चाहिए," – ओवैसी


जातिगत जनगणना को लेकर सरकार पर हमला

पाकिस्तान पर सख्त रुख के साथ-साथ ओवैसी ने जातिगत जनगणना (Caste Census) की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले जनगणना रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी या नहीं।

उन्होंने कहा:

"जाति जनगणना से ही पता चलेगा कि कौन सी जातियां कितनी पिछड़ी हैं, और किसे वाकई आरक्षण की जरूरत है। बीजेपी बार-बार ‘पसमांदा मुस्लिम’ की बात करती है, लेकिन उनके लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?"

ओवैसी ने यह भी कहा कि आरएसएस की केरल में हुई एक बैठक में भी जातिगत जनगणना की मांग उठाई गई थी। उन्होंने बीजेपी सरकार से टाइमलाइन साफ करने की मांग की कि जनगणना कब शुरू होगी, कब पूरी होगी और रिपोर्ट कब देश के सामने लाई जाएगी।


मोदी सरकार से दो टूक सवाल:

  • पीओके पर संसद का संकल्प कब ज़मीनी कार्रवाई में बदलेगा?

  • क्या 2029 से पहले देश को जातिगत जनगणना की रिपोर्ट मिलेगी?

  • पसमांदा समुदाय को लेकर घोषणाओं से आगे क्या हुआ?