सीएसजेएमयू में छात्रों ने सीखे ब्रांड संरक्षण के गुर:कॉर्पोरेट अधिवक्ता नवदीप श्रीधर ने आईपीआर पर दिया विशेष व्याख्यान

Oct 24, 2026 - 20:42
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सीएसजेएमयू में छात्रों ने सीखे ब्रांड संरक्षण के गुर:कॉर्पोरेट अधिवक्ता नवदीप श्रीधर ने आईपीआर पर दिया विशेष व्याख्यान
कानपुर में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर विशेष व्याख्यान शाम 5:30 बजे आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं कॉर्पोरेट अधिवक्ता व बौद्धिक संपदा विशेषज्ञ नवदीप श्रीधर ने विद्यार्थियों को ब्रांड पहचान, नवाचार और उत्पादों के कानूनी संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। नवदीप श्रीधर ने बताया कि प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में किसी उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी विशिष्ट पहचान, ब्रांड की विश्वसनीयता और बौद्धिक संपदा का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन, भौगोलिक संकेतक (जीआई), सेमीकंडक्टर एकीकृत परिपथों के लेआउट-डिजाइन और पौधों की किस्मों के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया। न्यूटेला, ओडोनिल और गोदरेज की केस स्टडी से समझाई ब्रांडिंग व्याख्यान में न्यूटेला, ओडोनिल और गोदरेज के उदाहरणों के माध्यम से ब्रांड पहचान, पैकेजिंग, उत्पाद डिजाइन और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी उत्पाद का नाम, लोगो, डिजाइन और उपभोक्ताओं के बीच बनी पहचान किस प्रकार उसकी व्यावसायिक संपत्ति बनते हैं। उचित कानूनी संरक्षण इन संपत्तियों के मूल्य को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इस कार्यक्रम में बासमती चावल की केस स्टडी के जरिए भौगोलिक संकेतक के महत्व को समझाया गया। बताया गया कि जीआई किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पादों की पहचान, प्रतिष्ठा और प्रामाणिकता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बनारसी उत्पादों और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े जीआई उत्पादों के उदाहरणों के साथ पंजीकरण प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा, कॉपीराइट के व्यावसायिक उपयोग, सॉफ्टवेयर संरक्षण तथा भारत और अमेरिका के कानूनी दृष्टिकोणों की जानकारी दी गई। पेटेंट के संदर्भ में नवीनता, आविष्कारशील कदम और औद्योगिक उपयोगिता की अहमियत भी बताई गई। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए उद्योगोन्मुखी शिक्षा और उद्यमिता की समझ विकसित करने में उपयोगी रहा। कार्यक्रम में डॉ. विवेक सिंह सचान, डॉ. सिंधांशु राय, डॉ. अर्पणा कटियार, डॉ. वारसी सिंह सहित छात्र हरगोविंद, साक्षी, लालसा तिवारी और अनुराधा यादव उपस्थित रहे।

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