स्कूलों में संविधान के मूल्य व्यवहार में उतारने की पहल:लखनऊ में प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों तक संवैधानिक जागरूकता पहुंचाने के तरीके बताए

Nov 02, 2026 - 21:50
0
स्कूलों में संविधान के मूल्य व्यवहार में उतारने की पहल:लखनऊ में प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों तक संवैधानिक जागरूकता पहुंचाने के तरीके बताए
संविधान के मूल्य अब विद्यार्थियों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनके व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनेंगे। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर लखनऊ के राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में पहली बार तीन दिवसीय संविधान संवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनपद के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों को संवैधानिक जागरूकता का केंद्र बनाना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुंवर मित्रेश कुमार सिंह के निर्देशन में हुए प्रशिक्षण का संयोजन जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र पांडेय के निर्देशन में कॉलेज के प्रधानाचार्य सुमीत कुमार श्रीवास्तव ने किया। संस्कृति विकसित करने पर चर्चा तीन दिवसीय प्रशिक्षण में संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, नीति निदेशक तत्व, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और विधि के शासन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने संवैधानिक प्रावधानों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को संविधान की जानकारी देने के साथ उसके मूल्यों को व्यवहार में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाए। स्कूलों में समान अवसर, लैंगिक समानता, भेदभाव रहित वातावरण, मानवीय गरिमा और पारस्परिक सम्मान की संस्कृति विकसित करने पर चर्चा हुई। प्रार्थना सभा से कक्षा तक पहुंचेगी संवैधानिक चेतना प्रधानाचार्यों को विद्यालयों में संविधान की प्रस्तावना का नियमित वाचन, मौलिक कर्तव्यों पर परिचर्चा, निबंध, भाषण, वाद-विवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित करने के लिए प्रेरित किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की शैक्षणिक और संस्थागत गतिविधियों के प्रमुख नेतृत्वकर्ता हैं। उनके माध्यम से संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। संविधान की समझ जीवन का हिस्सा बने कॉलेज के प्रधानाचार्य सुमीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यालयों की भूमिका परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को संवेदनशील, नैतिक, न्यायप्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी शिक्षा का उद्देश्य है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User