सुष्मिता देव का बड़ा राजनीतिक फैसला: तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा से इस्तीफा, राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल
तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। असम के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आने वाली सुष्मिता देव के इस फैसले को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 10 जून 2026
तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य रहीं सुष्मिता देव ने पार्टी तथा उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। उनके इस निर्णय को पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे के पीछे निजी और राजनीतिक कारणों का हवाला दिया है। उनके इस कदम के बाद विभिन्न राजनीतिक संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राज्यसभा सदस्यता से भी दिया इस्तीफा
सुष्मिता देव ने केवल पार्टी छोड़ने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उच्च सदन के सभापति को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक निर्णय है। उनके अनुसार राजनीति में आगे किस दिशा में कार्य करना है और किस नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना है, इसे लेकर उन्होंने गंभीर विचार के बाद यह फैसला लिया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी दल से इस्तीफा देना सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन राज्यसभा सदस्यता छोड़ना इस बात का संकेत है कि सुष्मिता देव अपने राजनीतिक जीवन में किसी बड़े बदलाव की तैयारी कर रही हैं। यही कारण है कि उनके अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को झटका
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस विभिन्न राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे में एक प्रमुख नेता का पार्टी छोड़ना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार सुष्मिता देव पूर्वोत्तर भारत में तृणमूल कांग्रेस का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं। उनकी सक्रियता और जनसंपर्क क्षमता के कारण पार्टी को उस क्षेत्र में पहचान मिली थी। ऐसे में उनका अलग होना संगठन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
असम के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध
सुष्मिता देव का संबंध असम के एक प्रतिष्ठित और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। उनके दादा सतिन्द्र मोहन देव स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लंबे समय तक स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।उनके पिता संतोष मोहन देव देश के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने छह बार लोकसभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया और केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। इस राजनीतिक विरासत ने सुष्मिता देव को प्रारंभ से ही सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के प्रति प्रेरित किया।
मां भी रही हैं सक्रिय जनप्रतिनिधि
सुष्मिता देव की माता भी सक्रिय राजनीति से जुड़ी रही हैं और विधानसभा सदस्य के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों को निकट से समझने का अवसर मिला।यही कारण है कि उन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। परिवार की राजनीतिक पहचान ने उनके लिए मार्ग अवश्य प्रशस्त किया, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान भी स्थापित की।
उच्च शिक्षा और विधि क्षेत्र में मजबूत पृष्ठभूमि
सुष्मिता देव ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विदेश में विधि की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट कानून में उच्च शिक्षा हासिल की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां उन्हें राजनीति और कानून दोनों क्षेत्रों में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।विधि शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया। कानून की समझ और सार्वजनिक नीतियों पर पकड़ ने उन्हें राजनीतिक जीवन में प्रभावी भूमिका निभाने में सहायता प्रदान की।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन
राजनीति में उनकी रुचि छात्र जीवन के दौरान ही विकसित हो गई थी। दिल्ली में अध्ययन के दौरान वे छात्र संगठनों से जुड़ीं और छात्र राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी दौर में उन्होंने नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक कौशल का परिचय दिया।छात्र राजनीति से प्राप्त अनुभव ने उन्हें आगे चलकर मुख्यधारा की राजनीति में मजबूत आधार प्रदान किया। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआती सीढ़ी साबित हुआ।
स्थानीय निकाय से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय निकाय स्तर से की थी। उन्होंने असम के प्रमुख नगर निकायों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जनसंपर्क और संगठन निर्माण पर विशेष ध्यान दिया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि जमीनी स्तर से शुरुआत कर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है। विभिन्न राजनीतिक जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
आगे की राजनीति पर टिकी देश की नजर
सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर उठ रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों में उनके संभावित प्रवेश को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके अनुभव, पारिवारिक विरासत और सार्वजनिक पहचान को देखते हुए आने वाले समय में वे राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल उनका इस्तीफा देश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।