शी जिनपिंग के उत्तर कोरिया दौरे से बढ़ी वैश्विक हलचल
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिवसीय दौरे पर उत्तर कोरिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। शी जिनपिंग और किम जोंग उन के बीच शिखर वार्ता शुरू हो चुकी है। इस दौरे को पूर्वोत्तर एशिया की राजनीति, चीन-उत्तर कोरिया संबंधों और अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | प्योंगयांग | 9 जून 2026
उत्तर कोरिया पहुंचे शी जिनपिंग, किम जोंग उन ने किया भव्य स्वागत
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंचे। एयरपोर्ट पर उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और उनकी पत्नी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद राजधानी के मुख्य समारोह स्थल पर चीनी राष्ट्रपति को सैन्य सम्मान दिया गया और दोनों देशों के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई। पिछले सात वर्षों में किसी चीनी शीर्ष नेता का यह पहला उत्तर कोरिया दौरा माना जा रहा है। यही कारण है कि इस यात्रा को केवल एक औपचारिक दौरा नहीं बल्कि एशियाई राजनीति और वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
सात साल बाद उत्तर कोरिया पहुंचे चीनी राष्ट्रपति
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूर्वोत्तर एशिया का रणनीतिक संतुलन तेजी से बदल रहा है। इससे पहले शी जिनपिंग और किम जोंग उन की मुलाकात सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई थी, जहां दोनों नेताओं ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई विदेशी नेताओं के साथ एक सैन्य समारोह में भाग लिया था। अब प्योंगयांग में हो रही यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम दौरा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का कोई भी शीर्ष नेता बिना बड़े रणनीतिक उद्देश्य के उत्तर कोरिया का दौरा नहीं करता। शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हाल ही में उन्होंने अमेरिका और रूस के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वार्ताएं की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस दौरे के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव अब भी मजबूत बना हुआ है और क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका निर्णायक है।
अमेरिका के लिए भी अहम संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग इस यात्रा के जरिए अमेरिका को भी एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। आने वाले महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठकों से पहले यह दौरा चीन की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। यदि चीन उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करता है तो यह अमेरिका के साथ होने वाली भविष्य की वार्ताओं में उसके लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ साबित हो सकता है।
रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकी पर नजर
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया और रूस के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया द्वारा रूस को सैन्य और अन्य प्रकार का सहयोग देने की खबरों के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग में तेजी आई है। इसके बदले रूस द्वारा उत्तर कोरिया को आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलने की भी चर्चा रही है। चीन नहीं चाहता कि उसका पारंपरिक सहयोगी उत्तर कोरिया पूरी तरह रूस के प्रभाव क्षेत्र में चला जाए। इसी कारण बीजिंग अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
परमाणु मुद्दे पर भी नजर
उत्तर कोरिया लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। किम जोंग उन चाहते हैं कि उत्तर कोरिया को एक परमाणु शक्ति के रूप में वैश्विक मान्यता मिले ताकि उस पर लगे प्रतिबंधों में राहत मिल सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सार्वजनिक रूप से उत्तर कोरिया पर परमाणु निरस्त्रीकरण का दबाव बनाने से बचेगा। इसके बजाय वह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने पर जोर देगा।
आर्थिक सहायता पर हो सकती है बड़ी घोषणा
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार इस शिखर वार्ता में आर्थिक सहयोग प्रमुख एजेंडा हो सकता है। उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था लंबे समय से प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के कारण दबाव में है। ऐसे में चीन द्वारा खाद्यान्न सहायता, उर्वरकों की आपूर्ति, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और संयुक्त आर्थिक परियोजनाओं की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। चीन उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए कई महत्वपूर्ण सहायता पैकेजों की घोषणा कर सकता है।
पर्यटन और व्यापार को मिल सकता है बढ़ावा
दोनों देशों के बीच सीमावर्ती व्यापार, परिवहन संपर्क और पर्यटन गतिविधियों को फिर से गति देने पर भी चर्चा हो सकती है। कोविड महामारी और विभिन्न प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों के बीच कई आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। अब उन्हें पुनर्जीवित करने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर
यह दौरा केवल चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव अमेरिका, रूस, जापान और दक्षिण कोरिया समेत पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, शी जिनपिंग और किम जोंग उन की यह मुलाकात आने वाले महीनों की कूटनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस शिखर वार्ता से कौन से बड़े समझौते और घोषणाएं सामने आती हैं तथा चीन और उत्तर कोरिया अपने संबंधों को किस नई ऊंचाई तक ले जाने में सफल होते हैं।