जामिया में 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव, आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार को घेरा
जामिया मिलिया इस्लामिया में करीब दो दशक बाद छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
जामिया मिलिया इस्लामिया में करीब दो दशक बाद छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा के बाद छात्र राजनीति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल आशुतोष रांका ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वहां छात्र संघ चुनाव कराने के संबंध में फैसला कब लिया जाएगा। रांका ने विश्वविद्यालयों में निर्वाचित छात्र संघ की आवश्यकता पर जोर दिया है।
आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार से पूछा सवाल
जामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बाद आशुतोष रांका ने सामाजिक माध्यम एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने राजस्थान सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार इस मुद्दे पर कब जागने की योजना बना रही है। रांका ने कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव होने ही चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद छात्र राजनीति और राजस्थान में चुनाव की मांग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
दो दशक बाद जामिया में चुनाव कराने का फैसला
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा को विद्यार्थियों की लंबे समय से चली आ रही मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ को वर्ष 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद से छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग समय-समय पर उठती रही है।
संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर होंगे चुनाव
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इसका अर्थ है कि चुनाव की समय-सीमा संविधान को स्वीकृति मिलने के बाद शुरू होगी। हालांकि, चुनाव की निश्चित तारीख संविधान को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। इस फैसले को विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था दोबारा स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने लिया फैसला
जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विद्यार्थी कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए। लंबे समय से चल रही इस मांग के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा की है। अब विद्यार्थियों की नजर संविधान को मंजूरी मिलने और चुनाव की तारीख घोषित होने पर रहेगी।
प्रदर्शनकारी छात्रों से सार्वजनिक माफी की शर्त
विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश में प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों और सामाजिक माध्यमों पर की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र प्रशासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान दिए गए बयानों, की गई कार्रवाइयों और सामाजिक माध्यमों पर की गई पोस्ट के लिए संवाददाता सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमत हुए हैं। इस घटनाक्रम के बीच छात्र संघ चुनाव की घोषणा और प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर भी ध्यान बना हुआ है।
एनएसयूआई ने भी मांगी माफी
समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने सामाजिक माध्यम एक्स पर पोस्ट साझा कर माफी मांगी है। यह घटनाक्रम जामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश में माफी से संबंधित शर्तों का उल्लेख किया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे किस तरह पूरी होती है।
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