3200 किमी की जलयात्रा पर निकला ‘गंगा विलास’ पहुंचा काशी:30 विदेशी पर्यटक करेंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन
दुनिया की सबसे लंबी नदी यात्रा के लिए चर्चित स्वदेशी रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’ एक बार फिर काशी पहुंच गया है। कोलकाता से रवाना हुआ यह लग्जरी क्रूज गाजीपुर होते हुए वाराणसी पहुंचा। इसमें जर्मनी, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों के 30 पर्यटक सवार हैं। काशी में तीन रात और दो दिन के प्रवास के दौरान विदेशी मेहमान बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेकेंगे, सारनाथ की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होंगे और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का दिव्य नजारा देखेंगे। क्रूज के आगमन को लेकर मल्टी मॉडल टर्मिनल पर तैयारियां चलती रहीं। पर्यटकों के काशी भ्रमण के बाद क्रूज की आगे की यात्रा और पर्यटकों के आवागमन की व्यवस्था की जाएगी। क्रूज संचालित करने वाली कंपनी हेरिटेज रिवर जर्नी (अंतरा) के चेयरमैन राज सिंह के मुताबिक, पर्यटक काशी के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। वापसी में कोलकाता जाने वाले 17 पर्यटकों में 12 विदेशी और पांच भारतीय शामिल होंगे। जनवरी 2023 में पहली बार काशी आया था क्रूज ‘गंगा विलास’ पहली बार जनवरी 2023 में वाराणसी पहुंचा था। उस समय रविदास घाट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रूज को वर्चुअल हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद क्रूज दुनिया की सबसे लंबी नदी यात्रा पर असम के डिब्रूगढ़ के लिए निकला था। इस यात्रा में 32 विदेशी पर्यटक सवार थे। क्रूज ने करीब 3,200 किलोमीटर की दूरी 51 दिनों में तय की थी। यात्रा के दौरान भारत और बांग्लादेश की कई नदियों, ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक केंद्रों और प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से देखने का मौका मिला था। इसके बाद भी यह क्रूज काशी आ चुका है। 27 नदियां, पांच राज्य और बांग्लादेश का सफर ‘गंगा विलास’ की यात्रा केवल नदी में चलने तक सीमित नहीं है। इसका मार्ग गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली, भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट और ब्रह्मपुत्र नदी से होकर गुजरता है। यात्रा के दौरान गंगा, भागीरथी, हुगली, विद्यावती, मातला, मेघना, पद्मा, जमुना और ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों का सफर शामिल है। इसका निर्धारित मार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के साथ बांग्लादेश से होकर गुजरता है। इस दौरान पर्यटकों को भारतीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, नदी तटों पर बसे शहरों और प्राकृतिक दृश्यों को देखने का अवसर मिलता है।
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