6 नवंबर से मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन:21 किलो चांदी के सिक्के भी बंटेंगे,देश के कोने-कोने से आयेंगे श्रद्धालु

Nov 02, 2026 - 09:31
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6 नवंबर से मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन:21 किलो चांदी के सिक्के भी बंटेंगे,देश के कोने-कोने से आयेंगे श्रद्धालु
काशी में धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों का एक साल का इंतजार खत्म होने जा रहा है। 6 से 10 नवंबर तक श्रद्धालु मां के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान मंदिर के खजाने से 10 लाख सिक्के और 10 बोरी से अधिक धान का लावा वितरित किया जाएगा। इस बार खजाने में 21 किलो चांदी से तैयार सिक्के भी शामिल किए गए हैं। मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत गोस्वामी शंकरपुरी महाराज ने बताया कि छह नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त में पूजन के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। 10 नवंबर को शयन आरती के बाद स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन अगले वर्ष तक के लिए बंद हो जाएंगे। मां के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की उम्मीद है। खजाने में शामिल होंगे 21 किलो चांदी के सिक्के इस वर्ष अन्नपूर्णा मठ-मंदिर की ओर से 21 किलो चांदी के सिक्के तैयार कराए गए हैं। सिक्कों पर मां स्वर्ण अन्नपूर्णा की आकृति और उनका मंत्र अंकित है। महंत शंकरपुरी महाराज के अनुसार, चार वर्ष पहले पांच किलो चांदी से सिक्के बनवाने की परंपरा शुरू हुई थी। भक्तों और दानदाताओं के सहयोग से इस वर्ष यह मात्रा 21 किलो तक पहुंच गई है। काशी में तैयार इन सिक्कों को मां के पूजित खजाने में शामिल किया जाएगा। ये किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बनाए गए हैं। खजाने से प्रसाद वितरण के दौरान जिस श्रद्धालु के भाग्य में होगा, उसे चांदी का सिक्का प्राप्त होगा। 501 कुंतल भोग की तैयारी अन्नकूट महोत्सव के लिए मंदिर में 501 कुंतल भोग तैयार किया जा रहा है। शरद पूर्णिमा से शुरू हुई तैयारी में 85 पुरुषों और महिलाओं का दल पं. शंभुनाथ उपाध्याय के नेतृत्व में जुटा है। भोग तैयार करने का काम 10 नवंबर की सुबह तक चलेगा। मंदिर की विशेष पद्धति से तैयार अन्नकूट का प्रसाद महीनों तक खराब नहीं होता और उसमें चींटियां भी नहीं लगतीं। अन्नकूट महोत्सव के बाद प्रसाद तिरुपति बालाजी को निवेदित करने के लिए 11 नवंबर की शाम हैदराबाद रवाना किया जाएगा। पांच नवंबर को बाबा विश्वनाथ को देंगे आमंत्रण परंपरा के अनुसार, पांच नवंबर को मंगला आरती के बाद महंत शंकरपुरी महाराज बाबा विश्वनाथ को अन्नकूट महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण देंगे। इस वर्ष उदयकाल में प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को मिलने के कारण अन्नकूट महोत्सव उसी दिन मनाया जाएगा।

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