2050 तक शहरों में भीषण गर्मी का खतरा: विश्व बैंक की चेतावनी, शहरी गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्ष २०५० तक शहरों में भीषण गर्मी का खतरा तेजी से बढ़ेगा, जिसका सबसे अधिक असर शहरी गरीबों पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार एशिया और अफ्रीका में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 27अप्रैल 2026 ।
वर्ल्ड बैंक की गंभीर चेतावनी रिपोर्ट
विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी, जिसका सबसे ज्यादा असर शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब लोगों पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष २०५० तक अत्यधिक गर्मी की चपेट में आने वाले शहरी गरीबों की संख्या में लगभग ७०० प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।
एशिया और अफ्रीका पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस बढ़ती गर्मी का सबसे गंभीर प्रभाव पश्चिमी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। इन इलाकों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में बढ़ता तापमान जीवन को और कठिन बना देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट आने वाले दशकों में सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को और बढ़ा सकता है।
शहरी इलाकों में बढ़ता तापमान क्यों है ज्यादा खतरनाक
शहरों में कंक्रीट और डामर की अधिकता के कारण तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ३ से ४ डिग्री अधिक रहता है। हरियाली की कमी और भीड़भाड़ वाली संरचना गर्मी को और बढ़ा देती है। वर्ल्ड बैंक ने इस स्थिति को “मूक हत्यारा” बताते हुए चेतावनी दी है कि यह स्वास्थ्य, कामकाज और जीवन स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
आर्थिक नुकसान का बड़ा खतरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तापमान बढ़ने की यही रफ्तार जारी रही तो वर्ष २०५० तक वैश्विक उत्पादन क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा। अनुमान है कि इससे वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग १.४ से १.७ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। यह नुकसान दुनिया की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
गरीब वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
शहरी गरीबों के पास गर्मी से बचाव के सीमित साधन होते हैं, ऐसे में वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। झुग्गी-झोपड़ियों और घनी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वर्ग स्वास्थ्य समस्याओं, कार्यक्षमता में गिरावट और जीवन स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करेगा।
समाधान के लिए सुझाव
वर्ल्ड बैंक ने इस संकट से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें शहरों की बेहतर योजना, ठंडी छतों का उपयोग, हरित क्षेत्र का विकास और गर्मी से बचाव की योजनाओं को लागू करना शामिल है। छतों पर हल्के रंग या परावर्तक सामग्री का उपयोग करके घरों के तापमान को कम किया जा सकता है।
हरियाली और आधुनिक निर्माण की जरूरत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाने और छोटे शहरी जंगल विकसित करने से तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही भवन निर्माण में ऐसे सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी गई है जो गर्मी को कम सोखें। बेहतर वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन भविष्य की जरूरत बन चुके हैं।
वर्ल्ड बैंक की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन अब एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो २०५० तक दुनिया के शहर “गर्मी के जाल” में फंस सकते हैं। अब जरूरत है कि सरकारें और समाज मिलकर इस चुनौती का समाधान खोजें।v
विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी, जिसका सबसे ज्यादा असर शहरी इलाकों में रहने वाले गरीब लोगों पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष २०५० तक अत्यधिक गर्मी की चपेट में आने वाले शहरी गरीबों की संख्या में लगभग ७०० प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।
एशिया और अफ्रीका पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस बढ़ती गर्मी का सबसे गंभीर प्रभाव पश्चिमी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। इन इलाकों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में बढ़ता तापमान जीवन को और कठिन बना देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट आने वाले दशकों में सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को और बढ़ा सकता है।
शहरी इलाकों में बढ़ता तापमान क्यों है ज्यादा खतरनाक
शहरों में कंक्रीट और डामर की अधिकता के कारण तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ३ से ४ डिग्री अधिक रहता है। हरियाली की कमी और भीड़भाड़ वाली संरचना गर्मी को और बढ़ा देती है। वर्ल्ड बैंक ने इस स्थिति को “मूक हत्यारा” बताते हुए चेतावनी दी है कि यह स्वास्थ्य, कामकाज और जीवन स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
आर्थिक नुकसान का बड़ा खतरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तापमान बढ़ने की यही रफ्तार जारी रही तो वर्ष २०५० तक वैश्विक उत्पादन क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा। अनुमान है कि इससे वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग १.४ से १.७ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। यह नुकसान दुनिया की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
गरीब वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
शहरी गरीबों के पास गर्मी से बचाव के सीमित साधन होते हैं, ऐसे में वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। झुग्गी-झोपड़ियों और घनी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वर्ग स्वास्थ्य समस्याओं, कार्यक्षमता में गिरावट और जीवन स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करेगा।
समाधान के लिए सुझाव
वर्ल्ड बैंक ने इस संकट से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें शहरों की बेहतर योजना, ठंडी छतों का उपयोग, हरित क्षेत्र का विकास और गर्मी से बचाव की योजनाओं को लागू करना शामिल है। छतों पर हल्के रंग या परावर्तक सामग्री का उपयोग करके घरों के तापमान को कम किया जा सकता है।
हरियाली और आधुनिक निर्माण की जरूरत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाने और छोटे शहरी जंगल विकसित करने से तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही भवन निर्माण में ऐसे सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी गई है जो गर्मी को कम सोखें। बेहतर वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन भविष्य की जरूरत बन चुके हैं।
वर्ल्ड बैंक की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन अब एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो २०५० तक दुनिया के शहर “गर्मी के जाल” में फंस सकते हैं। अब जरूरत है कि सरकारें और समाज मिलकर इस चुनौती का समाधान खोजें।