आरोप पत्र दाखिल करने में देरी पर हाईकोर्ट सख्त:अपर मुख्य सचिव (गृह) से मांगा जवाब, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्योरा भी देना होगा

Oct 30, 2026 - 23:42
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आरोप पत्र दाखिल करने में देरी पर हाईकोर्ट सख्त:अपर मुख्य सचिव (गृह) से मांगा जवाब, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्योरा भी देना होगा
आपराधिक मामले में आरोप पत्र तैयार होने के बाद उसे अदालत में दाखिल करने में करीब एक साल की देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर देरी की वजह बताने का निर्देश दिया है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर की गई सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। हलफनामा दाखिल नहीं होने पर उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। निहारिका मिश्रा की याचिका पर आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने निहारिका मिश्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। याचिका में आपराधिक धमकी और अश्लील सामग्री के प्रकाशन व प्रसारण से जुड़े मामले का आरोप पत्र अदालत में दाखिल कराने की मांग की गई थी। अगस्त में जल्द दाखिल करने की कही थी बात सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया था कि आरोप पत्र जल्द दाखिल कर दिया जाएगा। इसके बावजूद आरोप पत्र संबंधित अदालत में पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि आरोप पत्र 26 अक्टूबर 2025 को तैयार हुआ था और 20 दिसंबर 2025 को क्षेत्राधिकारी को भेजा गया था। अभियोजन अधिकारी ने लगाई थीं आपत्तियां सरकार के मुताबिक, 13 जनवरी 2026 को सहायक अभियोजन अधिकारी ने आरोप पत्र पर आपत्तियां लगाईं। इसके बाद मामला आगे की जांच के लिए वापस भेज दिया गया। खंडपीठ ने कहा कि सुनवाई के दौरान अधिकारियों को ये सभी तथ्य अदालत के सामने रखने चाहिए थे। रिपोर्ट दाखिल करने में अनिश्चित देरी मंजूर नहीं कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 177 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस रिपोर्ट दाखिल करने की तय समय-सीमा नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उसे अनिश्चित समय तक रोका जा सकता है। कानून के मुताबिक, रिपोर्ट बिना देरी मजिस्ट्रेट के सामने भेजी जानी चाहिए। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को तीन सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें देरी की वजह के साथ यह भी बताना होगा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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