अदालत ने गौरीबाजार थानाध्यक्ष की जांच के आदेश दिए:एसपी खुद या अपर पुलिस अधीक्षक से जांच कराएंगे; आदेश की प्रति प्रमुख सचिव और डीजीपी को भेजी
देवरिया में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के न्यायाधीश ब्रजेश मणि त्रिपाठी की अदालत ने शनिवार को गौरीबाजार थानाध्यक्ष के कामकाज और आचरण की जांच के आदेश दिए। अदालत ने एसपी को स्वयं या किसी अपर पुलिस अधीक्षक से जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव और लखनऊ स्थित डीजीपी कार्यालय को भी भेजी गई है। मामला भरण-पोषण की रकम नहीं देने से संबंधित है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौरीबाजार थाना क्षेत्र के असनहर निवासी विनोद साहनी पुत्र दीनानाथ साहनी के खिलाफ गिरफ्तारी और वसूली वारंट जारी करने का आदेश दिया था। परिवार न्यायालय ने थानाध्यक्ष को वारंट तामील कराने का निर्देश दिया, लेकिन आरोप है कि वारंट की तामील नहीं कराई गई। पीड़िता ने पेनड्राइव और शपथ पत्र दिए थानाध्यक्ष ने अदालत में रिपोर्ट दी कि विनोद साहनी रोजगार के सिलसिले में बाहर है। इसके बाद पीड़िता ने पेनड्राइव और शपथ पत्र प्रस्तुत कर दावा किया कि वह इलाके में ही मौजूद है। पीड़िता के मुताबिक, विनोद एक जनप्रतिनिधि के घर के बाहर पुलिसकर्मियों से मारपीट कर रहा था और पुलिस उसे बचा रही थी। उसने थानाध्यक्ष की रिपोर्ट को गलत बताया। आचरण पर अदालत ने जताई आपत्ति पेनड्राइव और शपथ पत्र का अवलोकन करने के बाद अदालत ने थानाध्यक्ष के आचरण पर टिप्पणी की। आदेश में कहा गया कि प्रथम दृष्टया उनके काम भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच योग्य प्रतीत होते हैं। अदालत ने थानाध्यक्ष पर न्यायालय के आदेश का जानबूझकर पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए इसकी जानकारी हाईकोर्ट को भी देने का निर्देश दिया। प्रमुख सचिव और डीजीपी को भेजे गए आदेश में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी सवाल अदालत ने मामले में एक जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही, प्रकरण को जिले के उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग सेल की बैठक में रखने का आदेश दिया है।
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