अमेरिका के हमले पर भड़का ईरान, दी खुली चेतावनी!
होर्मुज जलडमरूमध्य में कारोबारी जहाज पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बातचीत से विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
दि राइजिंग न्यूज़ | तेहरान | 27 जून 2026
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक कारोबारी जहाज पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने और बातचीत की प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया। ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसे न वार्ता की चिंता है और न ही शांति बनाए रखने की।
अमेरिका के हमले के बाद ईरान का तीखा पलटवार
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत के दौरान हमला करना किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझ और भरोसे के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय सैन्य दबाव की नीति अपना रहा है। उनके अनुसार युद्धविराम का उल्लंघन करने की जिम्मेदारी पूरी तरह अमेरिका पर है और इसका परिणाम भविष्य में उसे स्वयं भुगतना पड़ सकता है।
सांसद ने कहा- असफल अमेरिकी नेतृत्व ने फिर दिखाई मंशा
इब्राहिम अजीजी ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच सैन्य हमला कर अपनी वास्तविक नीति उजागर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी नेतृत्व ने युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद की भावना का सम्मान नहीं किया। अजीजी ने कहा कि केवल दूसरे पक्ष पर दोष मढ़ने से स्थिति नहीं बदलेगी और अब दुनिया को वास्तविक घटनाक्रम समझना होगा। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
आखिर अमेरिका ने क्यों की सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार 25 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन से हमला किया गया था। यह घटना ओमान के तट के निकट हुई, जिसके बाद अमेरिका ने इसे समुद्री सुरक्षा पर सीधा हमला माना। इसके अगले दिन अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई।
मिसाइल, ड्रोन और रडार ठिकानों पर बरसी अमेरिकी शक्ति
अमेरिकी सेना ने दावा किया कि जवाबी अभियान के दौरान ईरान के मिसाइल भंडारण केंद्र, ड्रोन संचालन ठिकाने तथा तटीय रडार प्रणाली को निशाना बनाया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार इन ठिकानों का उपयोग क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। अमेरिका ने यह भी कहा कि कारोबारी जहाज पर हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती था। इसी आधार पर सैन्य कार्रवाई को आवश्यक बताया गया।
समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने क्या कहा
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। अमेरिकी सेना ने सहयोगी देशों के साथ समन्वय जारी रखने की बात कही है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रह सकें। अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में सभी सैन्य इकाइयों को सतर्क रखा गया है और किसी भी नई चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ब्रिटेन ने भी जहाज पर हमले की पुष्टि की
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी पुष्टि की है कि ओमान के निकट एक कंटेनर जहाज किसी प्रक्षेप्य की चपेट में आया था। हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। ब्रिटेन ने कहा कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र की स्थिति का आकलन कर रही हैं। इससे स्पष्ट है कि यह मामला केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है।
समुद्री संगठन ने रोकी जहाजों की निकासी
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों की निकासी फिलहाल रोक दी है। संगठन का कहना है कि जब तक सभी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक निकासी अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में बड़ी संख्या में जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, लेकिन अब भी कई जहाज संवेदनशील क्षेत्र में मौजूद हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है, इसलिए यहां की किसी भी अस्थिरता पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।