अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में MMMUT को मिला 425वां स्थान:शोध प्रदर्शन के दम पर चार स्थान का सुधार
गोरखपुर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए एक और उपलब्धि हासिल की है। क्यूएस (क्वाक्वेरेली साइमंड्स) दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 में विश्वविद्यालय ने चार पायदान की छलांग लगाई है। पिछले साल 429वें स्थान पर रहने वाला एमएमएमयूटी इस बार 425वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग में भी विश्वविद्यालय ने लगातार दूसरे साल अपनी जगह बरकरार रखी है। उसे 1301 से 1400 के रैंकिंग बैंड में शामिल किया गया है। रैंकिंग में भारतीय संस्थानों के बीच एमएमएमयूटी को 244वां स्थान मिला है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सरकारी संस्थानों में विश्वविद्यालय नौवें और सरकारी व निजी संस्थानों को मिलाकर 13वें स्थान पर रहा। विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि में सबसे अहम भूमिका शोध कार्यों की रही है। प्रति शिक्षक शोध पत्र प्रकाशित करने के मामले में एमएमएमयूटी ने दक्षिण एशिया में 300वीं रैंक हासिल की है। इस श्रेणी में विश्वविद्यालय को 59.5 अंक मिले हैं, जो सभी मूल्यांकन मानकों में उसका सर्वाधिक स्कोर है। दो साल में एशिया रैंकिंग में बनाई जगह क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग में एमएमएमयूटी ने बीते वर्षों में अपनी स्थिति मजबूत की है। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय एशिया रैंकिंग की 901+ श्रेणी में शामिल था। इसके बाद वर्ष 2026 में उसे 1301-1400 के रैंकिंग बैंड में जगह मिली। वर्ष 2027 में भी विश्वविद्यालय इसी बैंड में अपनी स्थिति बरकरार रखने में सफल रहा। वहीं, दक्षिण एशिया की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले चार स्थान का सुधार हुआ है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाती है। शोध के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन रैंकिंग के अलग-अलग मानकों में विश्वविद्यालय को अच्छे अंक मिले हैं। प्रति शिक्षक शोध पत्र के मामले में 59.5 अंक के साथ दक्षिण एशिया में 300वीं रैंक मिली है। इसके अलावा शिक्षक-छात्र अनुपात में 23.1, अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क में 18.5 और प्रति शोध पत्र उद्धरण के मामले में 15.6 अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं, नियोक्ता प्रतिष्ठा में 6.0 और शैक्षणिक प्रतिष्ठा में 5.1 अंक मिले हैं। क्यूएस की ओर से विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन कई मानकों पर किया जाता है। इसमें पीएचडी धारक शिक्षकों की संख्या, शिक्षक-छात्र अनुपात, विदेशी शिक्षकों और विद्यार्थियों की भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग, शोध पत्रों का प्रकाशन, प्रति शोध पत्र उद्धरण और छात्र विनिमय कार्यक्रम जैसे बिंदु शामिल हैं। इन मानकों के आधार पर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान का आकलन किया जाता है। शोध सुविधाएं और विदेशी संस्थानों से सहयोग बढ़ाने पर जोर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि शिक्षा और शोध की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। इसके लिए शोध सुविधाओं को मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रों के प्रकाशन को प्रोत्साहित करने और विदेशी विश्वविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में शोध की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और संस्थागत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति और बेहतर हो सके।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)