40 दिन में कानपुर जू में 9 वन्यजीवों की मौत:सितंबर से अब तक 6 काले हिरण, जेब्रा-बाइसन और अब तेंदुए ने तोड़ा दम
कानपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 40 दिनों में 9 जानवरों की मौत हो चुकी है। बुधवार को 13 साल के तेंदुए मुराद ने भी दम तोड़ दिया। वह पिछले 4 दिनों से बीमार था। उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। आशंका है कि इलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उसकी मौत हो गई। मुराद के पैर में घाव हो गया था। वह बार-बार अपने पंजे के घाव को नोच रहा था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया। सैंपल जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भेजे गए हैं। 2018 में मुरादाबाद से किया गया था रेस्क्यू
मुराद को करीब 8 साल पहले मुरादाबाद से रेस्क्यू करके कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। साल 2018 में मुरादाबाद कैंट इलाके में एक तेंदुआ घुस आया था। इस दौरान उसने कई लोगों को घायल कर दिया था। करीब 24 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे पकड़ा गया था। मुरादाबाद से लाए जाने के कारण उसका नाम मुराद रखा गया। वह चिड़ियाघर में दो अन्य तेंदुओं के साथ जंगल सफारी के पास बने बाड़े में रह रहा था। कानपुर चिड़ियाघर में 28 तेंदुए थे, मुराद की मौत के बाद 27 तेंदुए बचे हैं। जिसमें से 19 नर और 8 मादा तेंदुए जू में बचे हैं। 40 दिन में 9 जानवरों की मौत की क्या वजह है
कानपुर चिड़ियाघर में पिछले करीब 40 दिनों में 9 वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। सितंबर के अंत में काले हिरण की मौत से शुरू हुआ सिलसिला अक्टूबर तक जारी रहा। इस दौरान कुल 6 काले हिरणों की मौत हो गई थी। लगातार मौतों के बाद बरेली के IVRI से विशेषज्ञों की टीम ने चिड़ियाघर पहुंचकर जांच की थी। मृत हिरणों के पोस्टमार्टम के बाद विसरा और अन्य सैंपल जांच के लिए भेजे गए। शुरुआती जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई गई थी। यह संक्रमण टैबनिड फ्लाई (एक प्रकार की मक्खी) के काटने से फैलने की आशंका रहती है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिड़ियाघर में मौजूद 87 काले हिरणों में से 26 का वैक्सीनेशन भी कराया गया था। हालाकि इस मामले में अभी तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। जेब्रा के नवजात और बायसन की भी हुई मौत
चिड़ियाघर में एक मादा जेब्रा ने करीब 15 साल बाद बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई। बच्चे के शरीर पर मौजूद रेड बैग (जन्म के समय बच्चे को ढकने वाली झिल्ली) नहीं फट सकी थी। इससे उसे सांस लेने में परेशानी हुई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। इसके अलावा कानपुर चिड़ियाघर में दो बायसनों के बीच बाड़े में हुई लड़ाई के दौरान एक बायसन के पेट में दूसरे के सींग से गंभीर चोट लग गई थी। अधिक खून बहने के कारण उसकी भी मौत हो गई थी। डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सक नहीं
लगातार हो रही मौतों के बीच कानपुर चिड़ियाघर में भी जांचों का सिलसिला जारी हुआ था। लेकिन अभी जानवरों की रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी हैं। यहां करीब डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। फिलहाल संविदा डॉक्टरों के जरिए वन्यजीवों का इलाज और देखरेख की जा रही है।
लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीवों के स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर इलाज और बाड़ों की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। काले हिरणों और तेंदुए की मौत की वास्तविक रिपोर्ट आने के बाद ही सब साफ हो सकेगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)