अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश:हाईकोर्ट ने रद्द किया विभाग का फैसला; ब्याज सहित बकाया देने के निर्देश
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मृत सरकारी कर्मचारी की अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन देने से इनकार करने का विभागीय आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शासनादेश से संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बने वैधानिक सेवा नियम नहीं बदले जा सकते। अदालत ने संबंधित विभाग को 15 मई 2024 से बकाया पारिवारिक पेंशन का भुगतान 6% सालाना ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मनीष कुमार की एकल पीठ ने शमीन खान की याचिका पर यह फैसला सुनाया। शमीन ने बताया कि उनके दिवंगत भाई ने सेवा पुस्तिका में उन्हें पारिवारिक पेंशन के लिए नामित किया था। इसके बावजूद विभाग ने 5 दिसंबर 2025 को उनका दावा खारिज कर दिया। विभाग ने 23 दिसंबर 2016 के शासनादेश का हवाला दिया था। उसके मुताबिक, अविवाहित बहन को मृत कर्मचारी के परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं माना गया था। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली, 1961 के नियम 3(5) पर गौर किया। इसमें अविवाहित और विधवा बहनों को परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने भी शमीन के अविवाहित बहन होने के तथ्य को नहीं नकारा। अदालत ने कहा कि वैधानिक नियमों में बदलाव के लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। कार्यपालिका केवल शासनादेश जारी करके अनुच्छेद 309 के तहत बने नियमों को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। कोर्ट ने पेंशन से इनकार करने का आदेश रद्द कर खाद्य एवं रसद विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि मृत कर्मचारी की मृत्यु की तारीख से वास्तविक भुगतान तक बकाया पेंशन 6% सालाना ब्याज सहित दी जाए।
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