भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एफआईआर
बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा मोड़ आया है। एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मृतक के परिजन लगातार मामले को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | भोजपुर | 24 जून 2026
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़
बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मामले में जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, शाहपुर थाना प्रभारी तथा मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मृतक के परिजनों की शिकायत और एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों के बाद की गई है। एफआईआर दर्ज होने से मामले की जांच को नया आयाम मिल गया है।
परिजनों ने उठाए थे सवाल
भरत तिवारी की मुठभेड़ में मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। परिवार का आरोप है कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी चर्चा पैदा की थी, जिसके बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे।
न्यायिक जांच पर परिवार को भरोसा नहीं
घटना के एक सप्ताह बाद भी मृतक के परिजनों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। परिवार ने सरकार द्वारा घोषित न्यायिक जांच पर अविश्वास जताते हुए कहा है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।मृतक के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि परिवार को न्याय मिलने में देरी हो रही है। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
आत्मदाह की चेतावनी
परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार सामूहिक आत्मदाह जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो सकता है। परिवार का कहना है कि उनकी मांग केवल जांच नहीं बल्कि जिम्मेदार लोगों को दंडित किए जाने की है।हालांकि प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी रहने की बात कही जा रही है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
मोबाइल फोन को लेकर भी सवाल
मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने दावा किया है कि घटना के समय भरत तिवारी के पास दो मोबाइल फोन थे। उनके अनुसार पुलिस ने एक मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल परिवार को लौटा दी है, लेकिन दूसरा निजी मोबाइल अभी भी पुलिस के कब्जे में है।परिवार ने दूसरे मोबाइल फोन को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उसे उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मोबाइल में मौजूद जानकारी मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
जांच पर टिकी निगाहें
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले पर राज्यभर की नजरें टिकी हुई हैं। जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया से यह उम्मीद की जा रही है कि मामले के सभी तथ्यों को सामने लाकर निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचा जाएगा।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल में जुटी हुई हैं।