मिशन 2029 की तैयारी में कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
लोकसभा चुनाव 2029 की तैयारी में कांग्रेस ने संगठन में व्यापक बदलाव किए हैं। पार्टी ने कई राज्यों के प्रभारियों और संगठनात्मक पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। राहुल गांधी की ‘सामाजिक न्याय’ रणनीति को केंद्र में रखते हुए दलित, पिछड़े और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 जुलाई 2026
लोकसभा चुनाव 2029 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों की शुरुआत कर दी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले वर्षों में भाजपा के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक मुकाबले के लिए संगठन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना आवश्यक है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और फेरबदल की घोषणा की है।पार्टी के भीतर इन बदलावों को राहुल गांधी की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सामाजिक न्याय, संविधान की रक्षा और संगठन को जनआंदोलन की शक्ल देने पर विशेष जोर दिया गया है।
सामाजिक न्याय की राजनीति को मिलेगा नया बल
कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्होंने अविनाश पांडे की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के बीच कांग्रेस की पैठ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।राजेंद्र पाल गौतम आम आदमी पार्टी में मंत्री रह चुके हैं और दलित अधिकारों के मुद्दों पर मुखर रहे हैं। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी के अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। अब उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्य की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की मुहिम को और आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
बसपा और अन्य दलों के साथ संवाद के संकेत
हाल के सप्ताहों में राजेंद्र पाल गौतम उस समय चर्चा में आए थे जब वे लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन इस घटनाक्रम को विपक्षी दलों के बीच संभावित संवाद और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा गया।गौतम का कहना है कि कांग्रेस संविधान और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों के साथ संवाद के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी और समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
राहुल गांधी की सोच से प्रभावित हुए राजेंद्र पाल गौतम
राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी के साथ हुई अपनी चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने आम लोगों की समस्याओं और न्याय की मांग को करीब से समझा। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने समाज के वंचित और दबे-कुचले वर्गों के लिए संघर्ष को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है।गौतम ने कहा कि राहुल गांधी सामाजिक न्याय के मुद्दे को केवल राजनीतिक नारे के रूप में नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
सेवा दल की कमान बीवी श्रीनिवास को
कांग्रेस के संगठनात्मक फेरबदल में सबसे चर्चित नियुक्तियों में से एक बीवी श्रीनिवास की है। पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास को कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है।कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों और विभिन्न जनआंदोलनों में सक्रिय भूमिका के कारण बीवी श्रीनिवास ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। महंगाई, बेरोजगारी, कृषि कानून, एनआरसी-सीएए जैसे मुद्दों पर आंदोलन खड़े करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि श्रीनिवास की नियुक्ति से सेवा दल में नई ऊर्जा आएगी और संगठन का जमीनी ढांचा मजबूत होगा।
‘बब्बर शेरों’ का संगठन तैयार करने की तैयारी
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद बीवी श्रीनिवास ने कहा कि उनका लक्ष्य कांग्रेस सेवा दल को युवाओं की ऊर्जा और अनुभवी कार्यकर्ताओं की समझ का संगम बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐसा अनुशासित और वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध कैडर तैयार किया जाएगा जो संविधान, लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर समय तैयार रहे।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस सेवा दल को सक्रिय करना राहुल गांधी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें पार्टी को केवल चुनावी संगठन नहीं बल्कि जनआंदोलन आधारित राजनीतिक ताकत के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मणिकम टैगोर को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद मणिकम टैगोर को भी संगठन में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। संसद के भीतर विपक्षी रणनीति और पार्टी समन्वय में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें राहुल गांधी के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। तमिलनाडु की राजनीति और वहां उभरते नए राजनीतिक समीकरणों के बीच टैगोर की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का लक्ष्य केवल वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी 2029 के चुनाव के लिए व्यापक जनआंदोलन की नींव रख रही है।
हरियाणा, ओडिशा समेत कई राज्यों में बदलाव
संगठनात्मक फेरबदल के तहत हरियाणा और ओडिशा सहित कई राज्यों में भी नए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद बी.के. हरिप्रसाद को हरियाणा प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह महाराष्ट्र के पूर्व विधायक और एआईसीसी सचिव संजय दत्त को हरियाणा का नया प्रभारी बनाया गया है।वहीं सेवा दल के पूर्व प्रमुख लालजी देसाई को ओडिशा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। अजय लल्लू को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया गया है।
पंजाब, राजस्थान और झारखंड में भी बदलाव संभव
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार आने वाले सप्ताहों में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई राज्यों में भी संगठनात्मक बदलाव किए जा सकते हैं। पार्टी नेतृत्व विभिन्न राज्यों में संगठन की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नई नियुक्तियां की जा सकती हैं।
क्या बदलेगी कांग्रेस की कार्यशैली
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करना है। पिछले कई चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और संगठनात्मक कमजोरी को इसकी बड़ी वजह माना गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल नियुक्तियां कर देने से स्थिति नहीं बदलेगी। वास्तविक बदलाव तभी संभव होगा जब नए पदाधिकारियों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता, जवाबदेही और जमीनी स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा।हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि राहुल गांधी अब संगठनात्मक फैसलों में अधिक सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों में हाल के महीनों में दिखाई गई सक्रियता आने वाले वर्षों में कांग्रेस के पुनर्गठन की दिशा तय कर सकती है।लोकसभा चुनाव 2029 अभी दूर है, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी राजनीतिक तैयारी शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि सामाजिक न्याय, संगठनात्मक पुनर्गठन और जमीनी आंदोलन की यह रणनीति पार्टी को कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है।