अरब सागर की हवाओं ने दिल्ली को बनाया भट्ठी
दिल्ली में गर्मी ने इस बार खतरनाक रूप ले लिया है, जहां असल तापमान 41.3 डिग्री होने के बावजूद ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण अरब सागर से आ रही नम हवाएं और मानसून की देरी है, जिससे हवा में नमी बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यही नमी शरीर की प्राकृतिक ठंडक प्रक्रिया को रोक रही है, जिससे गर्मी और ज्यादा खतरनाक महसूस हो रही है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 जून 2026
दिल्ली में पारा 41, लेकिन महसूस 51 डिग्री जैसा
दिल्ली में शनिवार को मौसम विभाग के आंकड़ों ने चौंका दिया। शहर का वास्तविक अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन ‘फील्स लाइक’ या हीट इंडेक्स 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह इस मौसम का अब तक का सबसे अधिक महसूस होने वाला तापमान माना जा रहा है।
क्या होता है ‘फील्स लाइक’ तापमान
अक्सर लोग पूछते हैं कि जब थर्मामीटर 41 डिग्री दिखा रहा है तो 51 डिग्री कैसे महसूस हो रहा है। इसका जवाब हीट इंडेक्स में छिपा है।हीट इंडेक्स असल में वह तापमान होता है जो शरीर को नमी और गर्मी को मिलाकर महसूस होता है। जब हवा में नमी ज्यादा होती है तो पसीना ठीक से सूख नहीं पाता, जिससे शरीर अपनी प्राकृतिक ठंडक खो देता है।
शरीर की ठंडक प्रणाली कैसे प्रभावित होती है
मानव शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता है। पसीना जब त्वचा से वाष्पित होता है तो शरीर की गर्मी कम होती है। लेकिन अगर हवा में पहले से ही नमी ज्यादा हो तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।इसी कारण व्यक्ति को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्मी महसूस होती है।
वेट बल्ब तापमान और खतरे की सीमा
मौसम वैज्ञानिक वेट बल्ब तापमान का इस्तेमाल यह समझने के लिए करते हैं कि शरीर कितनी गर्मी सह सकता है।दिल्ली में यह तापमान लगभग 29.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार 32 डिग्री के आसपास का वेट बल्ब तापमान इंसान के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है, जबकि 35 डिग्री पर शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम लगभग काम करना बंद कर देता है।
दिल्ली में इतनी नमी क्यों बढ़ी
स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञों के अनुसार इस बार अरब सागर से आने वाली हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत तक नमी लेकर पहुंच रही हैं।आमतौर पर दिल्ली की गर्मी सूखी होती है, लेकिन इस बार वातावरण में नमी ज्यादा होने के कारण गर्मी ‘ड्राई हीट’ के बजाय ‘ह्यूमिड हीट’ में बदल गई है, जो ज्यादा असहनीय और खतरनाक मानी जाती है।दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसूनी सिस्टम अभी पूरी तरह दिल्ली तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे मौसम में असंतुलन बना हुआ है।
सूखी और नम गर्मी में अंतर
सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे शरीर को थोड़ी राहत मिलती है। लेकिन नम गर्मी में पसीना हवा में नहीं सूख पाता और शरीर लगातार गर्मी महसूस करता रहता है।इसी कारण इस समय दिल्ली में तापमान कम होने के बावजूद गर्मी का असर बहुत ज्यादा महसूस हो रहा है।
राहत कब मिलेगी
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार के बाद मौसम में बदलाव की संभावना है। मंगलवार और बुधवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।हफ्ते के अंत तक बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ मौसम में राहत मिल सकती है। अनुमान है कि शुक्रवार तक रात का तापमान लगभग 22 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।मॉनसून के 4 जुलाई के बाद दिल्ली पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष की बजाय समझने वाली बात
इस समय असली चुनौती सिर्फ उच्च तापमान नहीं, बल्कि हवा में बढ़ती नमी है। यही नमी शरीर की प्राकृतिक ठंडक प्रक्रिया को बाधित कर रही है और गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना रही है।