दिल्ली में बादल, फिर भी बारिश क्यों नहीं

दिल्ली में पिछले कई दिनों से घने बादल छाने के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे मानसून का सक्रिय और विराम चक्र जिम्मेदार है। इस दौरान बादल बनने के बावजूद वर्षा के लिए जरूरी अनुकूल परिस्थितियां विकसित नहीं हो पातीं, जिससे राजधानी में उमस और गर्मी लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही मानसून दोबारा सक्रिय होगा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ जाएगी।

दिल्ली में बादल, फिर भी बारिश क्यों नहीं
दिल्ली में बादल, फिर भी बारिश क्यों नहीं

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 जुलाई 2026

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले कई दिनों से आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश इलाकों में अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे मानसून का सक्रिय और विराम चक्र जिम्मेदार है। इस दौरान बादल तो बनते हैं, लेकिन वर्षा के लिए जरूरी अनुकूल परिस्थितियां विकसित नहीं हो पातीं। इसी वजह से दिल्ली में उमस लगातार बढ़ रही है और लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही।


दिल्ली में बादल तो छा रहे, फिर बारिश क्यों नहीं हो रही जानिए मानसून के सक्रिय और विराम चक्र की पूरी कहानी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून आने के बाद लोगों को लगातार अच्छी बारिश की उम्मीद थी। शुरुआती बारिश के बाद ऐसा लगा कि अब राजधानी में मौसम पूरी तरह बदल जाएगा और भीषण गर्मी से राहत मिल जाएगी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक आसमान में काले और घने बादल छाए रहते हैं, वातावरण में नमी भी बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश इलाकों में बारिश नहीं हो रही। कहीं-कहीं हल्की फुहारें जरूर पड़ रही हैं, लेकिन वे भी लोगों को गर्मी और उमस से राहत देने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रही हैं।बारिश नहीं होने के कारण राजधानी में उमस लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को दिन के साथ-साथ रात में भी चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जब आसमान पूरी तरह बादलों से ढका हुआ है तो बारिश क्यों नहीं हो रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे मानसून की एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया काम कर रही है, जिसे सक्रिय और विराम चक्र कहा जाता है।


क्या होता है मानसून का सक्रिय और विराम चक्र

भारतीय मानसून एक समान गति से पूरे मौसम में काम नहीं करता। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मानसून समय-समय पर अपनी तीव्रता बदलता रहता है। जब मानसून पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता है तो समुद्र से नमी से भरी हवाएं बड़ी मात्रा में उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ती हैं। इससे बादलों का घनत्व बढ़ता है और कई राज्यों में लगातार अच्छी बारिश होती है। इस अवधि को मानसून का सक्रिय चरण कहा जाता है।इसके विपरीत कुछ दिनों के लिए मानसून की गति धीमी पड़ जाती है। इसे मानसून का विराम चक्र कहा जाता है। इस दौरान नमी वाली हवाओं की ताकत कम हो जाती है और वर्षा कराने वाली मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप बादल तो दिखाई देते हैं, लेकिन वे पर्याप्त वर्षा नहीं करा पाते। दिल्ली इस समय ऐसे ही विराम चक्र से गुजर रही है, इसलिए बादलों की मौजूदगी के बावजूद अच्छी बारिश नहीं हो रही।


बादल होने के बावजूद बारिश क्यों नहीं होती

सामान्य तौर पर लोग यह मानते हैं कि यदि आसमान में घने बादल हैं तो बारिश जरूर होगी, लेकिन मौसम विज्ञान इसके पीछे कहीं अधिक जटिल प्रक्रिया बताता है। केवल बादलों का बन जाना ही वर्षा होने की गारंटी नहीं होता। बारिश के लिए वातावरण में पर्याप्त नमी, तापमान का सही संतुलन, ऊपर उठती गर्म हवाएं और वायुमंडलीय दबाव का अनुकूल होना जरूरी होता है।यदि इन परिस्थितियों में से कोई एक भी कमजोर पड़ जाए तो बादल बनने के बावजूद वे वर्षा नहीं कर पाते। कई बार बादल ऊंचाई पर ही बिखर जाते हैं, जबकि कई बार उनमें मौजूद नमी दूसरी दिशा में चली जाती है। कुछ परिस्थितियों में बादल केवल छाया बनाकर गुजर जाते हैं और जमीन तक पानी नहीं पहुंच पाता। यही कारण है कि दिल्ली में पिछले कई दिनों से बादल दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हो रही।


दिल्ली में उमस इतनी ज्यादा क्यों महसूस हो रही है

बारिश न होने के बावजूद हवा में नमी लगातार बनी हुई है। बादलों के कारण सूर्य की सीधी किरणें कम पहुंचती हैं, लेकिन वातावरण में मौजूद जलवाष्प शरीर से निकलने वाले पसीने को जल्दी सूखने नहीं देती। यही कारण है कि लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक उमस महसूस होती है।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो राजधानी में उमस और बढ़ सकती है। ऐसे मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलता है, जिससे थकान, पानी की कमी और गर्मी से जुड़ी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है।


क्या अल नीनो भी डाल रहा है असर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर समुद्र और वातावरण में होने वाले बदलाव भी भारतीय मानसून को प्रभावित करते हैं। अल नीनो ऐसी ही एक महत्वपूर्ण जलवायु घटना है, जिसका असर कई देशों की वर्षा प्रणाली पर पड़ता है। इसके प्रभाव से कई बार मानसून कमजोर हो जाता है या वर्षा का वितरण असंतुलित हो जाता है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल अल नीनो को ही दिल्ली में बारिश न होने का कारण नहीं माना जा सकता। किसी शहर में वर्षा होने या न होने के पीछे स्थानीय हवाओं की दिशा, नमी, तापमान, बादलों की ऊंचाई और वायुदाब जैसी कई स्थानीय परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती हैं। इसलिए मौसम की स्थिति कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होती है।


आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की गतिविधियां लगातार बदलती रहती हैं। जैसे ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी वाली हवाएं दोबारा मजबूत होंगी और वर्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी, दिल्ली और आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है। मानसून का सक्रिय चरण लौटने पर कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी, उमस कम होगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि मौसम विभाग लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर नया पूर्वानुमान जारी कर रहा है।


मानसून के दौरान सही जानकारी क्यों जरूरी है

मानसून के मौसम में कई बार सोशल मीडिया पर मौसम से जुड़ी भ्रामक जानकारियां तेजी से फैल जाती हैं। ऐसे में लोगों को केवल आधिकारिक मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। बारिश में कुछ दिनों की देरी या बीच में बारिश रुक जाना असामान्य नहीं है, बल्कि यह मानसून की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरे मानसून के दौरान वर्षा एक समान नहीं होती। कई बार कुछ दिनों तक बिल्कुल बारिश नहीं होती और फिर अगले कुछ दिनों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है। इसलिए किसी एक-दो दिन के मौसम को देखकर पूरे मानसून का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।


दिल्लीवासियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

जब तक अच्छी बारिश नहीं होती, तब तक उमस और गर्मी लोगों के लिए परेशानी बनी रह सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, धूप में लंबे समय तक रहने से बचें और छोटे बच्चों, बुजुर्गों तथा बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें।यदि मौसम विभाग भारी बारिश या आंधी की चेतावनी जारी करता है तो उसके अनुसार अपनी यात्रा और दैनिक कार्यों की योजना बनानी चाहिए। साथ ही मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।