ओ-जोन में चला बुलडोजर, बढ़ी लोगों की चिंता

दिल्ली के ओ-जोन में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजधानी के जोनल विभाजन की चर्चा तेज हो गई है। यमुना डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान ने लोगों को अपने इलाके के जोन और मास्टर प्लान की स्थिति जानने के लिए मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति खरीदने से पहले जोन की जानकारी लेना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

ओ-जोन में चला बुलडोजर, बढ़ी लोगों की चिंता

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 04 जून 2026

यमुना डूब क्षेत्र में कार्रवाई के बाद अपने इलाके का जोन जानना हुआ जरूरी

दिल्ली में यमुना के डूब क्षेत्र में चल रही बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मजनू का टीला, वजीराबाद, जगतपुर और अन्य क्षेत्रों में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका घर या संपत्ति किस जोन में स्थित है और भविष्य में किसी कार्रवाई की जद में तो नहीं आएगी। दिल्ली उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण और प्रशासन ने यमुना के डूब क्षेत्र में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई ने राजधानी के जोनल विभाजन और मास्टर प्लान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

आखिर क्या है ओ-जोन

दिल्ली के मास्टर प्लान में ओ-जोन को यमुना नदी के डूब क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां स्थायी निर्माण और कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध या विशेष नियम लागू होते हैं। हाल के दिनों में जिन इलाकों में कार्रवाई हुई है, उनमें मजनू का टीला, जगतपुर, वजीराबाद और मदनपुर खादर के कछारी क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण खड़े कर दिए गए थे।

दिल्ली को कितने जोनों में बांटा गया है

दिल्ली विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार राजधानी को योजनाबद्ध विकास के लिए 15 प्रमुख जोनों में विभाजित किया गया है। इन जोनों को अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के आधार पर नाम दिया गया है।

जोन-ए

पुरानी दिल्ली और ऐतिहासिक क्षेत्र इस जोन में आते हैं। चांदनी चौक, जामा मस्जिद, कश्मीरी गेट, पहाड़गंज और सदर बाजार इसके प्रमुख इलाके हैं।

जोन-बी

करोल बाग, पटेल नगर, आनंद पर्वत और सराय रोहिल्ला जैसे इलाके इस जोन का हिस्सा हैं।

जोन-सी

उत्तर दिल्ली के कई प्रमुख क्षेत्र जैसे सिविल लाइंस, कमला नगर, मॉडल टाउन, अशोक विहार और विश्वविद्यालय क्षेत्र इसी जोन में आते हैं।

जोन-डी

राष्ट्रीय राजधानी का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कूटनीतिक क्षेत्र इसी जोन में शामिल है। कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी, खान मार्केट और लोधी रोड इसके प्रमुख हिस्से हैं।

जोन-ई

पूरी पूर्वी दिल्ली को इस जोन में रखा गया है। शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार और आनंद विहार इसके मुख्य क्षेत्र हैं।

जोन-एफ

दक्षिण दिल्ली के विकसित और महंगे इलाकों को इसमें शामिल किया गया है। साकेत, वसंत कुंज, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क और हौज खास इसी जोन में आते हैं।

जोन-जी

पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र जैसे राजौरी गार्डन, जनकपुरी, विकासपुरी और उत्तम नगर इसमें शामिल हैं।

जोन-एच

रोहिणी, पीतमपुरा, शालीमार बाग और सरस्वती विहार जैसे योजनाबद्ध क्षेत्र इस जोन का हिस्सा हैं।

जोन-जे

महरौली, छतरपुर, सैनिक फार्म और घिटोरनी जैसे ग्रामीण एवं शहरी गांव क्षेत्र इसी जोन में आते हैं।

जोन-के

द्वारका, नजफगढ़, पालम और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र इस जोन में शामिल हैं।

जोन-एल

दिल्ली के पश्चिमी ग्रामीण सीमावर्ती इलाके इस श्रेणी में आते हैं।

जोन-एम

रोहिणी के कई विस्तार क्षेत्र, मंगोलपुरी और सुल्तानपुरी इस जोन का हिस्सा हैं।

जोन-एन

बवाना, कंझावला और अलीपुर जैसे बाहरी ग्रामीण क्षेत्र इस जोन में रखे गए हैं।

जोन-ओ

सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला यह जोन यमुना के डूब क्षेत्र को दर्शाता है। हालिया बुलडोजर कार्रवाई इसी क्षेत्र में की गई है।

जोन-पी

नरेला, बुराड़ी और उत्तरी दिल्ली के कई विस्तार क्षेत्रों को इस जोन में शामिल किया गया है।

घर खरीदने से पहले क्यों जरूरी है जोन की जानकारी

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले केवल कीमत और स्थान देखना पर्याप्त नहीं है। यह जानना भी जरूरी है कि वह संपत्ति किस जोन में स्थित है और उस क्षेत्र में निर्माण, विस्तार या व्यावसायिक उपयोग को लेकर क्या नियम लागू हैं। यदि कोई संपत्ति पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र, डूब क्षेत्र या प्रतिबंधित विकास क्षेत्र में आती है तो भविष्य में कानूनी कार्रवाई या ध्वस्तीकरण का खतरा बढ़ सकता है।

बढ़ सकती है निगरानी

यमुना डूब क्षेत्र में हुई हालिया कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि दिल्ली के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी प्रशासन निगरानी बढ़ा सकता है। ऐसे में अवैध निर्माणों और नियमों के विपरीत विकसित परियोजनाओं पर सख्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।