दिल्ली हाईकोर्ट बोला- शादी से परेशान बेटी का साथ दें:किसी अनहोनी का इंतजार न करें, मायके लौटना शर्म की बात नहीं

Nov 04, 2026 - 19:11
0
दिल्ली हाईकोर्ट बोला- शादी से परेशान बेटी का साथ दें:किसी अनहोनी का इंतजार न करें, मायके लौटना शर्म की बात नहीं
नई दिल्ली में बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शादी में हिंसा झेल रही बेटी को परिवार का समय पर साथ मिलना जरूरी है। बेटी का मायके लौटना परिवार के लिए शर्म की बात नहीं होनी चाहिए। जस्टिस मधु जैन ने यह टिप्पणी अनिसिया बत्रा की 2018 में आत्महत्या के मामले में की। कोर्ट ने उनके पति मयंक सिंघवी को क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से मुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने मयंक के माता-पिता को क्रूरता और दहेज हत्या के आरोपों से मुक्त करने का ट्रायल कोर्ट का फैसला भी बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि पति के रिश्तेदारों को केवल रिश्ते के आधार पर आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना चाहिए। बेटी की सुरक्षा और सम्मान को शादी बचाने से ऊपर बताया हाईकोर्ट ने कहा, “जब कोई बेटी अपनी शादी में हिंसा या लगातार दुर्व्यवहार की बात करे, तब मायके वालों का समय पर साथ बहुत जरूरी है।” कोर्ट ने कहा कि उसकी चिंताओं को “समझौता कर लो” की सलाह देकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामाजिक आलोचना के डर से उसे सुरक्षित घर देने में देरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस जैन ने कहा, “बेटी का मायके लौटना कभी भी परिवार के लिए शर्म की बात नहीं होना चाहिए। शादी बचाना उसकी सुरक्षा और सम्मान से ऊपर नहीं हो सकता। साथ देने के लिए किसी बड़ी और दुखद घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए।” पति के रिश्तेदारों को लेकर कोर्ट की चिंता हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पति के रिश्तेदारों को क्रूरता के व्यापक आरोपों के आधार पर आरोपी बनाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि परेशान शादी से पैदा हुई पीड़ा समझी जा सकती है। लेकिन इसके आधार पर पूरे परिवार को आपराधिक मुकदमे में घसीटना सही नहीं है, जब तक हर व्यक्ति की खास भूमिका सामने न आए। जस्टिस मधु जैन ने कहा, “आपराधिक मुकदमे का असर अदालत से बाहर भी होता है। इससे प्रतिष्ठा, रोजगार और पारिवारिक जीवन प्रभावित होते हैं।” उन्होंने कहा कि कानून को क्रूरता झेलने वाली महिला को प्रभावी सुरक्षा देनी चाहिए। साथ ही, पति के रिश्तेदारों को केवल पति से संबंध होने के कारण मुकदमे का सामना नहीं करना चाहिए। बिना वजह पति को भी दंडित नहीं किया जाना चाहिए। पति को दोनों आरोपों से किया मुक्त पति को आरोपों से मुक्त करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन की सामग्री में किसी भी अपराध के जरूरी तत्व सामने नहीं आते। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मतभेद, उत्पीड़न या तनावपूर्ण रिश्ता अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। इसके लिए किसी व्यक्ति का सकारात्मक और जानबूझकर किया गया योगदान सामने आना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आत्महत्या करने वाली महिला कोई संदेश छोड़कर किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराती है, तो केवल इससे आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित नहीं होता। 2018 में हुई थी अनिसिया की मौत जर्मन एयरलाइन में काम करने वाली 39 वर्षीय अनिसिया बत्रा ने कथित तौर पर 13 जुलाई 2018 को दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क में आत्महत्या की थी। उनके माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनके पति उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। मयंक उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले गए थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कोर्ट का यह फैसला अनिसिया के माता-पिता, मयंक और राज्य की ओर से दायर तीन रिविजन याचिकाओं पर आया। इन याचिकाओं में दिसंबर 2019 के सेशन कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। सेशन कोर्ट ने मयंक को दहेज हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने उनके खिलाफ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप तय करने का निर्देश दिया था। मयंक के माता-पिता आरएस सिंघवी और सुषमा सिंघवी को सेशन कोर्ट ने इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था। दहेज और पैसों की मांग का आरोप अभियोजन ने आरोप लगाया था कि अनिसिया को शारीरिक और मानसिक क्रूरता झेलनी पड़ी। उस पर पैसों की मांग और उसकी मां के साथ संयुक्त रूप से owned फ्लैट की बिक्री से मिली रकम को लेकर दबाव भी बनाया गया। अनिसिया की मां ने आरोप लगाया था कि उनके पति और ससुराल वाले बार-बार पैसे मांगते थे। उन्होंने कहा था कि अनिसिया की मौत से पहले के समय में वैवाहिक विवाद बढ़ गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के दौरान हर वित्तीय मांग या लेन-देन को दहेज नहीं माना जा सकता। इसके लिए मांग और शादी के बीच जरूरी संबंध दिखना चाहिए। यह संबंध मांग की प्रकृति और आसपास की परिस्थितियों से सामने आना चाहिए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User