दूसरे की जमीन का फर्जी बैनामा कराने वाले को सजा:35 साल पुराने मामले में 10 साल का कारावास, 2 लाख रुपए जुर्माना लगा
कानपुर देहात में दूसरे की जमीन का धोखाधड़ी से फर्जी बैनामा कराने के करीब 35 साल पुराने मामले में अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया। एफटीसी-1 कोर्ट ने दोषी मथुरा लोधी को 10 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 2 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया। जुर्माना नहीं जमा करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 1991 में दर्ज हुआ था मुकदमा मामला 27 मार्च 1991 का है। रसूलाबाद थाना क्षेत्र के मायाराम निवादा मजरा असालतगंज निवासी मथुरा लोधी पुत्र मुल्ला लोधी पर दूसरे व्यक्ति के खेत का धोखाधड़ी से फर्जी बैनामा कराने का आरोप था। इस मामले में डेरापुर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 35/1991 दर्ज किया गया था। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में केस दर्ज हुआ था। छह महीने में दाखिल हुआ था आरोप पत्र पुलिस ने मामले की जांच के दौरान वादी और गवाहों के बयान दर्ज किए। साक्ष्य जुटाने के बाद 20 सितंबर 1991 को आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई चली। करीब साढ़े तीन दशक तक चली सुनवाई में गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी बुधवार, 4 नवंबर 2026 को एफटीसी-1 न्यायालय ने मथुरा लोधी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के साधारण कारावास और 2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत डेरापुर थाना पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल ने मामले में प्रभावी पैरवी की। इसी के बाद 35 साल पुराने मुकदमे में दोषी को सजा दिलाई जा सकी।
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